Sehore News: सीहोर। मध्य प्रदेश में करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर कॉलेजों में युवाओं की जेन-जी राजनीति का रंग जमने जा रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा सितंबर के प्रथम सप्ताह तक छात्र संघ चुनाव कराने के निर्देशों के बाद जिले में सियासी चहल-पहल तेज हो गई है। फैसले को युवाओं के लोकतंत्र की जीत बताते हुए कांग्रेस और एनएसयूआई ने प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की पुरजोर मांग उठाई है।
जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से छात्र संघ चुनाव न होने के कारण नई पीढ़ी के युवाओं का नेतृत्व विकास थम सा गया था। उन्होंने सरकार से मांग की कि चुनाव अप्रत्यक्ष कराने के बजाय प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएं। प्रत्यक्ष प्रणाली में सामान्य छात्र सीधे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और सह सचिव का चुनाव कर सकेंगे, जिससे आम विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
सत्ता के दम पर आवाज दबाने का लगाया आरोप
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि बीते एक दशक में चुनाव न होने से शैक्षणिक संस्थानों में सत्ता समर्थित छात्र संगठनों को संरक्षण दिया गया, जिससे आम विद्यार्थियों के मुद्दों और आवाज को दबाया जाता रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनएसयूआई की यह लड़ाई छात्र-विरोधी व्यवस्थाओं को समाप्त करने और युवाओं को उनका लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने के लिए है।
कॉलेजों में शुरू हुआ सघन सदस्यता अभियान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एनएसयूआई के सघन सदस्यता अभियान के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि बुधवार से सीहोर जिले के सभी सरकारी व निजी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में व्यापक अभियान शुरू कर दिया गया है। संगठन के कार्यकर्ता परिसरों में जाकर जेन-जी छात्रों से सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उन्हें छात्र राजनीति के महत्व से जोड़ेंगे।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ शंखनाद
एनएसयूआई ने राज्य सरकार से मांग की है कि सितंबर के पहले सप्ताह में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराए जाएं। इस दौरान वरिष्ठ नेता कृष्णकांत रिछारिया, तुलसी राजकुमार राठौर, भगत सिंह तोमर, यश यादव, तनीष त्यागी, विक्की विश्वकर्मा, अनुभव सेन, दिव्यांश मालवीय, शुभम् त्यागी और विष्णु मालवीय सहित बड़ी संख्या में छात्र कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


