17 दिन से मॉच्र्युरी में रखा है नवजात का शव, परिजनों का आरोप, अस्पताल की लापरवाही से हुई मौतश्, सीएस बोले- 20 जुलाई से लापता थे परिजन

सीहोर। जिला अस्पताल में एक बेहद संवेदनहीनता से भरा मामला सामने आया है। श्यामपुर के सीलखेड़ा निवासी एक गरीब परिवार की नवजात बच्ची की मौत के 17 दिन बीत जाने के बाद भी उसका शव अस्पताल की मॉच्र्युरी में रखा हुआ है। एक तरफ जहां पीडि़त परिजन अस्पताल प्रशासन पर इलाज में घोर लापरवाही और दुव्र्यवहार का आरोप लगाते हुए शव लेने से इनकार कर रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन परिजनों पर इलाज में सहयोग न करने का दावा कर सफाई पेश कर रहा है।
जानकारी के अनुसार सीलखेड़ा निवासी मजदूरी करने वाले शिवनारायण की पत्नी सविता ने 30 जून को बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची का वजन काफी कम था और सांस लेने में तकलीफ थी, जिसके चलते उसे तुरंत जिला अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट में भर्ती कराया गया। पीडि़त मां सविता का आरोप है कि बच्ची के भर्ती रहने के दौरान जब भी वे दूध पिलाने या देखने जाती थीं तो डॉक्टर और स्टाफ उन्हें भगा देते थे। उन्हें बच्ची की सही स्थिति या रिपोर्ट नहीं दी जाती थी। पिता शिवनारायण के अनुसार गरीब परिवार होने के बावजूद अस्पताल में रुकने और इलाज की दौड़धूप में उनके करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये खर्च हो गए, फिर भी बच्ची को बचाया नहीं जा सका। परिजनों के मुताबिक 23 जुलाई को बच्ची की मौत हुई, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड में मौत 24 जुलाई दर्ज है।
सफाई, परिजन ने 20 जुलाई से आना बंद किया
मामले में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और तूल पकडऩे के बाद सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव ने अस्पताल का पक्ष रखा। सीएस के अनुसार 30 जून से भर्ती बच्ची की हालत गंभीर थी, उसका वजन गिर रहा था और पीलिया बढ़ रहा था, इसलिए डिस्चार्ज संभव नहीं था। उन्होंने बताया कि परिजनों को स्थिति समझाए जाने के बावजूद वे बार-बार छुट्टी की जिद कर रहे थे और 20 जुलाई से उन्होंने अस्पताल आना ही बंद कर दिया था। जब स्टाफ ने उनसे संपर्क किया तो परिजनों ने आने के लिए दैनिक भत्ते की मांग की, जबकि दैनिक भत्ता एनआरसी में मिलता है, एसएनसीयू में नहीं।
24 जुलाई को हुई मौत
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि 23 जुलाई को तबीयत अधिक बिगडऩे पर बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद 24 जुलाई की दोपहर 1.50 बजे उसकी मृत्यु हो गई। मौत के बाद भी जब परिजन शव लेने नहीं पहुंचे, तब नियमानुसार स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई और शव को मॉच्र्युरी में सुरक्षित रखवाया गया। सिविल सर्जन ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।
मॉच्र्युरी में शव खराब होने की आशंका
चिकित्सकीय नियमों के मुताबिक मॉच्र्युरी में किसी भी शव को सुरक्षित रखने की अधिकतम सीमा लगभग दो सप्ताह होती है। 17 दिन बीत जाने के कारण अब शव के खराब होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अस्पताल प्रबंधन परिजनों से लगातार संपर्क कर उन्हें समझाने और नियमानुसार अंतिम संस्कार करने की अपील कर रहा है, जबकि परिजन दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।