सीहोर। आश्विन मास का पावन शारदीय नवरात्रि शक्ति महापर्व इस वर्ष बेहद खास और शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। आगामी 11 अक्टूबर रविवार को चित्रा नक्षत्र के साथ नवरात्रि का शुभारम्भ होगा, जिसका समापन 20 अक्टूबर मंगलवार को होगा। इस बार नवरात्रि का यह पावन पर्व पूरे 10 दिनों तक श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। पर्व के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अति उत्तम माना गया है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में उल्लेख मिलता है कि जब नवरात्रि शक्ति पर्व का शुभारम्भ रविवार के दिन होता है, तब मां दुर्गा का वाहन हाथी ‘गज’ होता है। इस वर्ष माता रानी हाथी की सवारी पर पधार रही हैं। शास्त्रों के अनुसार मां भगवती का हाथी पर आगमन देश-प्रदेश में सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा, कृषि क्षेत्र में वृद्धि, व्यापारिक उन्नति और भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती का प्रतीक माना जाता है।
वर्ष में चार बार आती है नवरात्रि
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि एक वर्ष में कुल चार नवरात्रि पर्व आते हैं। इनमें से दो प्रकट नवरात्रि होती हैं, जो चैत्र मास और आश्विन मास में मनाई जाती हैं। वहीं दो अप्रत्यक्ष ‘गुप्त’ नवरात्रि माघ मास और आषाढ़ मास में आती हैं। प्रत्यक्ष नवरात्रि में श्रद्धालु सार्वजनिक और पारिवारिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि गुप्त नवरात्रि में साधक एकांत में रहकर गुप्त साधना करते हैं।
मां भगवती के इन 9 दिव्य स्वरूपों की होगी आराधना
प्रथम दिन: मां शैलपुत्री
द्वितीय दिन: मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय दिन: मां चंद्रघंटा
चतुर्थ दिन: मां कुष्मांडा
पंचम दिन: मां स्कंदमाता
षष्ठम दिन: मां कात्यायनी
सप्तम दिन: मां कालरात्रि
अष्टम दिन: मां महागौरी
नवम दिन: मां सिद्धिदात्री
पंडित शर्मा ने बताया कि नवरात्रि में शिव-शक्ति की आराधना से मनुष्य के सभी रोग, दोष और कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दौरान की जाने वाली साधना का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे गुप्त रखना चाहिए।
शास्त्रोक्त पूजा विधि और नियम
नवरात्रि पूजन विधान की जानकारी देते हुए पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में घटस्थापना अखंड ज्योति प्रज्वलित करने और ज्वारे बोने का विशेष महत्व बताया गया है। पहले दिन संकल्प लेकर शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें और अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा, भगवान शिव और भैरव जी की नियमित पूजा-आरती करें। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवमी तिथि को मां दुर्गा और दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से पूर्णाहुति हवन संपन्न करें। इसके पश्चात कन्या पूजन, कन्या भोजन और ब्राह्मण पूजन कराकर व्रत का पारण करें।


