रूठिया परिवार को लंदन से आया यह जवाब…

#Sehore, सीहोर। इतिहास के पन्नों से निकलकर एक बेहद दिलचस्प और चकित कर देने वाला मामला सामने आया है। समाजसेवी विनय रुठिया ने दावा किया है कि ब्रिटिश सरकार पर उनके परिवार का एक पुराना लोन बकाया है, जिसका भुगतान अंग्रेजों ने अब तक नहीं किया है। इस अनोखे मामले में कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद ब्रिटेन के यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस का ईमेल से आधिकारिक जवाब भी आ गया है, जिसने इस पूरे मामले को और भी रोचक बना दिया है।
रुठिया परिवार का दावा है कि उनके पूर्वजों ने ब्रिटिश शासनकाल के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये लोन के रूप में दिए थे। इस कथित कर्ज की वसूली के लिए विनय रुठिया ने हार नहीं मानी और अपने वकील श्रेयांश रानीवाला के माध्यम से यूके सरकार को बाकायदा एक कानूनी नोटिस भेज दिया।
लंदन से आया जवाब, भेजें सबूत और दस्तावेज
कानूनी नोटिस मिलने के बादए 3 अगस्त को ब्रिटेन के लोन विभाग की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई। विभाग ने रुठिया परिवार से इस लोन से जुड़े दस्तावेज, शर्तें और अन्य जरूरी प्रमाण मांगे। इसके बाद विनय रुठिया ने अपने वकील के जरिये ब्रिटिश सरकार के राजनीतिक एजेंट के हस्ताक्षर वाले लिखित दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड ईमेल के माध्यम से लंदन भेज दिए।
हमारे रिकॉर्ड में ऐसा कोई कर्ज नहीं
दस्तावेज देखने और मामले की जांच करने के बाद लंदन स्थित यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस के कम्युनिकेशंस विभाग ने 16 अक्टूबर को एक अंतिम ईमेल भेजा। ईमेल में यूके सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया मामले की गहन जांच की गई है, लेकिन विभाग को इस कथित लोन का ऐसा कोई रिकॉर्ड या प्रमाण नहीं मिला, जिसके आधार पर यूनाइटेड किंगडम सरकार की कोई वित्तीय जिम्मेदारी या भुगतान की कानूनी बाध्यता स्थापित हो सके। सरल शब्दों में कहें तो ब्रिटिश सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनके पास इस कर्ज का कोई खाता-बही या आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
रुठिया ने उठाए गंभीर सवाल
ब्रिटिश सरकार के इस जवाब से विनय रुठिया संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने यूके प्रशासन के इस रुख पर कड़ा एतराज जताया है। रुठिया का कहना है कि जब शुरुआत में ब्रिटेन के विभाग ने खुद ही दस्तावेज मांगे थे और परिवार ने राजनीतिक एजेंट के हस्ताक्षर वाले ठोस लिखित सबूत मुहैया करा दिए तो अब यह कहना कि रिकॉर्ड नहीं मिल रहा, कई बड़े सवाल खड़े करता है। विनय रुठिया ने मांग की है कि ब्रिटिश सरकार इस ऐतिहासिक लोन से जुड़े दस्तावेजों और उसकी वास्तविक स्थिति को लेकर पूरी पारदर्शिता के साथ स्पष्ट जानकारी दे।
सच्चाई की पुष्टि होना अभी बाकी
हालांकि इस कथित लोन की वास्तविक प्रकृति, इसकी नियम व शर्तें और क्या आज के समय में ब्रिटिश सरकार पर इसका कानूनी भुगतान बनता है या नहीं, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन सीहोर से लेकर लंदन तक फैला यह अनूठा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।