#Sehore, सीहोर। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों सीहोर जिला चर्चा का केंद्र बना हुआ है, लेकिन इस चर्चा की वजह कोई विकास कार्य नहीं, बल्कि एक अजीबोगरीब राजनीतिक सन्नाटा है। सीहोर जिले के ग्राम कोसमी में प्रशासन और वन विकास निगम की एक कार्रवाई ने हडक़ंप मचा दिया है, जिसके बाद से जिले के भीतर चल रही अंदरूनी सियासत और नेताओं के पाले बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
बता दें मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोसमी का है। यहां बरेला समुदाय के 12 गरीब आदिवासी परिवारों के लिए रविवार का दिन आफत बनकर आया। वन विकास निगम के अमले ने अचानक जेसीबी चलवाकर इन गरीब आदिवासियों के वर्षों पुराने कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया। सिर्फ मकान ही नहीं तोड़े गए, बल्कि आरोप है कि उनकी खेतों में खड़ी फसल को भी पूरी तरह रौंद दिया गया और पानी के कुओं को भी बंद कर दिया गया। सिर से छत छिन जाने के बाद बेबस महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है, बच्चों को सुलाने के लिए माताओं को पेड़ों पर झूले तक बांधने पड़ रहे हैं।
पीडि़तों का दर्द देख भावुक हो गए शिवराज-कार्तिकेय
यह पूरा क्षेत्र केंद्रीय कृषि मंत्री और स्थानीय सांसद शिवराज सिंह चौहान का गढ़ माना जाता है। जैसे ही शिवराज सिंह चौहान को इस अमानवीय कार्रवाई की खबर मिलीए वे अपने भोजपुर के कार्यक्रम को छोडक़र तत्काल कोसमी गांव पहुंच गए। पीडि़तों का दर्द और बिलखती महिलाओं को देखकर पूर्व मुख्यमंत्री फौरन भावुक हो गए। उन्होंने इस कार्रवाई को जुल्म और अन्याय की पराकाष्ठा बताया। शिवराज पीडि़तों के साथ जमीन पर धरने पर बैठ गए। इसके अगले ही दिन उनके बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे। कार्तिकेय ने न सिर्फ आदिवासियों का हाल जाना, बल्कि उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन भी किया और अधिकारियों को चेतावनी दी कि पीडि़त परिवारों की टूटी छत वापस लाई जाएगी।
स्वागत में आगे रहने वाले नेता कोसमी से नदारद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीहोर जिले की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जो शिवराज सिंह चौहान 18 साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और जिनके दिल्ली से भोपाल लौटने या सीहोर आने पर जिले के बीजेपी नेता चौक-चौराहों पर स्वागत के लिए फूलों की मालाएं लेकर खड़े रहते थे, वे आज इस संकट की घड़ी में पूरी तरह गायब नजर आए। कोसमी के धरना प्रदर्शन में इक्का-दुक्का नेताओं को छोडक़र सीहोर जिले का एक भी बड़ा बीजेपी नेता शामिल होने नहीं पहुंचा। न तो किसी नेता ने जमीन पर उतरकर आदिवासियों का साथ दिया और न ही सोशल मीडिया फेसबुक या एक्स पर शिवराज या कार्तिकेय के इस धरने के समर्थन में एक शब्द भी लिखा। हालांकि यह भी सच है कि शिवराज देश के बड़े कद्दावर नेता हैं, जिन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं है्र लेकिन जिले के भाजपाइयों का यह मौन और दूरी बनाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
कांग्रेस बोली, मतलबी निकला संगठन
जिले के बीजेपी नेताओं की इस खामोशी पर विपक्ष को भी बड़ा मौका मिल गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश परमार ने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया मतलब की है। सीहोर के बीजेपी नेताओं को डर है कि यदि वे शिवराज सिंह चौहान के साथ खड़े हुए तो राज्य की वर्तमान सरकार उनसे नाराज हो जाएगी। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उन्हें मिलने वाले छोटे-मोटे पद या लाभ छिन सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि जिन लोगों ने हमेशा शिवराज को अपना नेता माना, उन्हें इस संकट में उनके साथ खड़ा होना चाहिए था।


