Sehore News: सीहोर। जिला अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही, डॉक्टरों की जिद और सिस्टम की बेरुखी के चलते जिस मासूम नवजात के शव को 19 दिनों तक मर्चुरी में न्याय का इंतजार करना पड़ा, आखिरकार उसे 20वें दिन मुक्ति मिल गई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में मामला आते ही जिला अस्पताल प्रबंधन में हडक़ंप मच गया और आनन-फानन में कागजी औपचारिकताएं पूरी कर बच्ची के शव को परिजनों को सौंपकर अंतिम संस्कार कराया गया।
बता दें मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर ग्राम सीलखेड़ा निवासी मजदूरी करने वाले शिवनारायण की पत्नी सविता ने 30 जून को एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के समय वजन कम होने के कारण नवजात को जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि जब बच्ची की हालत बिगडऩे लगी तो वे उसे किसी निजी अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन वार्ड में तैनात डॉक्टर जयप्रकाश परमार की जिद और मनमानी के कारण समय पर न तो रेफर किया गया और न ही डिस्चार्ज। अंतत: 24 जुलाई को इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया।
बीमारी छिपाते थे, डांटकर भगा देते थे डॉक्टर
बिलखती मां सविता ने बताया कि जब भी वह अपनी बच्ची को देखने या दूध पिलाने अंदर जाती थीं तो डॉक्टर और स्टाफ उन्हें डांटकर बाहर भगा देते थे। उन्हें बच्ची की सेहत की सही जानकारी तक नहीं दी जाती थी। वहीं पीएम आवास के एक छोटे से कमरे में रहने वाले पिता शिवनारायण ने बताया कि मजदूरी कर उन्होंने दवाओं और इलाज में करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये खर्च कर दिए फिर भी उनकी बच्ची नहीं बच सकी।
इंसाफ के लिए 19 दिनों तक मर्चुरी में रखा रहा शव
दोषी डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर पीडि़त परिवार अड़ गया और शव लेने से इनकार कर दिया। परिजनों ने कलेक्टर बालागुरु के., एसपी सोनाक्षी सक्सेना और कोतवाली थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। बता दें यह सीहोर जिले के इतिहास में पहला मामला था, जब एक नवजात का शव 19 दिनों तक अंतिम संस्कार के इंतजार में अस्पताल की मर्चुरी में रखा रहा।
मानवाधिकार आयोग की सख्ती से मचा हडक़ंप
जब इस बेहद संवेदनहीन मामले की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य व बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो तक पहुंची तो उन्होंने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए त्वरित संज्ञान लेने और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आयोग की दखल की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई।


