Sehore News: सीहोर। सीहोर और आसपास के जिलों के गरीब मरीजों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भोपाल के निजी अस्पतालों द्वारा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान राशि से लाखों रुपए ऐंठने का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में सामने आ रहा है कि जिन मरीजों को कभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं किया गया, कागजों पर उन्हें गंभीर बताकर सरकारी खजाने से भारी-भरकम भुगतान उठा लिया गया।
ताजा मामला भोपाल के मुबारकपुर स्थित करीब 30 बेड वाले जीवन ज्योति अस्पताल से जुड़ा है। यहां अगस्त 2025 में 71 मरीजों का इलाज दिखाकर सरकार से करीब 49 लाख रुपए का भुगतान लिया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड में सीहोर जिले के मरीजों के नाम भी प्रमुखता से दर्ज हैं। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सीहोर जिले में योजना से जुड़े और सर्वसुविधायुक्त अस्पताल पहले से मौजूद हैं तो इतनी बड़ी संख्या में सीहोर के मरीज भोपाल के इस छोटे से अस्पताल में इलाज कराने क्यों पहुंचे।
मरीजों को खबर तक नहीं, मंजूर हो गई राशि
पड़ताल में सामने आया है कि सीहोर और अन्य जिलों के कई मरीजों तथा उनके परिजनों को इस बात की खबर तक नहीं है कि उनके नाम पर सरकार से लाखों रुपए मंजूर कराए जा चुके हैं। फर्जी एस्टीमेट और कागजात लगाकर मरीजों को कागजों पर भर्ती दिखाया गया और सहायता राशि सीधे अस्पतालों के खातों में ट्रांसफर करा ली गई।
करोंद के 10 से ज्यादा अस्पतालों का भुगतान अटका
ऐसी ही फर्जीवाड़े और धांधली की शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार ने भोपाल के करोंद क्षेत्र के 10 से अधिक निजी अस्पतालों का स्वेच्छानुदान से होने वाला भुगतान फिलहाल रोक दिया है। हालांकि सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इन अस्पतालों पर क्या कार्रवाई की गई है।
बता दें कि प्रदेश सरकार गरीब मरीजों के इलाज के लिए हर साल मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से लगभग 300 करोड़ रुपए जारी करती है। लेकिन सीहोर और आसपास के जिलों के मरीजों के नाम पर हो रही इस धांधली के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन यह जांच कर रहा है कि मरीजों को वाकई इलाज मिला या सिर्फ उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हुआ है।


