सीहोर। मध्य प्रदेश के पटवारियों के लिए राज्य सरकार के राजस्व विभाग से एक बड़ी राहत दी है। शासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी पटवारी पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। वहीं दूसरी ओर अपनी लंबित मांगों को लेकर जिले के करीब 440 पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका बन गई है।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स और संभागायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट आदेश दिए हैं कि राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत प्रतिवेदनों के आधार पर यदि किसी पटवारी के खिलाफ मामला बनता भी है तो पहले उसकी प्रारंभिक जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। जांच में दोष सिद्ध होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने 20 जुलाई को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई थी कि वसीयत या अदालती मामलों में पटवारी केवल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और अंतिम फैसला न्यायालय का होता है, फिर भी बिना गहन जांच के उन पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती थी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश भर के हजारों पटवारियों को झूठी और जल्दबाजी में होने वाली पुलिस कार्रवाई से बड़ी राहत मिलेगी।
मांगों को लेकर पटवारी सामूहिक अवकाश पर
एक तरफ जहां सरकार ने एफआईआर को लेकर राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ के आह्वान पर सीहोर जिले के लगभग 440 पटवारी 3 अगस्त से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। जिले में 110 पद पहले से ही खाली हैं, ऐसे में पटवारियों के अचानक बस्ते जमा कर कलमबंद हड़ताल पर जाने से आम जनता और किसानों की समस्याएं बढ़ गई हैं।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बार-बार ध्यानाकर्षण के बावजूद सरकार उनकी अन्य जायज मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर शासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा।


