सीहोर। सीहोर-भोपाल हाईवे पर 25 एकड़ में फैला 127 करोड़ रुपये की लागत से बना राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान इन दिनों अपनी बदहाली के कारण किसी चुटकुले से कम नजर नहीं आ रहा। भव्य और आलीशान इमारत देखकर लगता है कि यहां देश स्तरीय इलाज मिलेगा, लेकिन हकीकत यह है कि यह करोड़ों की इमारत महज एक रैफरल सेंटर बनकर रह गई है। राष्ट्रीय स्तर का तमगा हासिल होने के बाद भी यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं किसी सामान्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से भी गई-बीती हैं।
बता दें संस्थान में वर्तमान में केवल 4 असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के डॉक्टर तैनात हैं। हास्यास्पद बात यह है कि इस विशाल नेशनल इंस्टीट्यूट में गंभीर मानसिक रोगियों को भर्ती करने तक की कोई सुविधा नहीं है। जब भी कोई गंभीर मरीज यहां पहुंचता है तो डॉक्टर इलाज करने के बजाय हाथ खड़े कर देते हैं और उसे तुरंत एम्स भोपाल या ग्वालियर मेंटल अस्पताल के लिए रैफर कर दिया जाता है।
रोज औसतन 5 मरीज, धूल फांक रहे उपकरण
हालत यह है कि संस्थान में रोजाना औसतन केवल 5 मरीज ही ओपीडी पहुंच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां कुल 162 मरीज पहुंचे थेए वहीं 5 साल बाद (2025-26 में) यह आंकड़ा बढक़र मात्र 1662 तक ही पहुंच सका।
ओपीडी बिल्डिंग की क्लीनिकल लैब के पास 30 से अधिक ऐसी नई व्हीलचेयर रखी हैं, जिनकी अब तक सील भी नहीं खुली है। थैरेपी के लाखों-करोड़ों के अत्याधुनिक मेडिकल इंस्ट्रूमेंट धूल खा रहे हैं, क्योंकि उनका उपयोग करने के लिए न तो साइकियाट्रिस्ट हैं और न ही थैरेपिस्ट।
अस्थायी जुगाड़ से चल रहा ‘नेशनल’ दर्जा
संस्थान में साइकियाट्रिस्ट और काउंसलर्स के 20 महत्वपूर्ण पद खाली हैं। डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर समेत केवल 10 कर्मचारी ही स्थायी हैं। बाकी व्यवस्था 23 संविदा और 38 आउटसोर्स कर्मचारियों के अस्थायी जुगाड़ के भरोसे चल रही है, जिनमें एक भी डॉक्टर नहीं है।
हाईवे पर 9 किमी का चक्कर, बस स्टॉप तक गायब
मरीजों के लिए अस्पताल पहुंचने की राह भी किसी यातना से कम नहीं है। सीहोर की तरफ से आने वाले मरीजों के लिए हाईवे पर कोई कट पॉइंट नहीं है, जिससे उन्हें 9 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। भोपाल की तरफ से आने वालों के लिए संस्थान के सामने कोई बस स्टॉप तक नहीं बनाया गया है। इधर निदेशक महोदय का तर्क है कि लोग मानसिक मामलों में आने से झिझकते हैं, लेकिन जनता का सीधा सवाल है, जब 127 करोड़ के भवन में डॉक्टर, बेड और बुनियादी सुविधाएं ही नहीं होंगी तो कोई मरीज यहां रैफर होने के लिए क्यों आएगा।
साल-दर-साल ओपीडी का आंकड़ा
2020-21: 33 नए मरीज, कुल 162
2021-22: 44 नए मरीज, कुल 361
2022-23: 97 नए मरीज, कुल 364
2023-24: 601 नए मरीज, कुल 1,704
2024-25: 652 नए मरीज, कुल 1,819
2025-26: 1,103 नए मरीज, कुल 1,622


