#Sehore, सीहोर। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। निर्वाचन आयोग के शेड्यूल के मुताबिक 12 नवंबर को मतदान होना है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे बीजेपी खेमे में संभावित चेहरों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सूबे के कई जिलों से आने वाले दिग्गजों के नाम सुर्खियों में हैं, लेकिन इस सियासी दौड़ के बीच एक ऐसा सवाल तैर रहा है जो हर सीहोरवासी की जुबान पर है, क्या वाकई सीहोर में राज्यसभा जाने लायक काबिल नेता नहीं हैं।
बता दें मध्य प्रदेश की राजनीति में सीहोर जिले का रसूख किसी से छिपा नहीं है। खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इसी जिले से आते हैं तो वहीं प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री भी यहीं की इछावर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह वही माटी है जहां से देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दिवंगत पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जैसी दिग्गज हस्तियां सांसद रह चुकी हैं।
चार विधानसभा सीट बुधनी, सीहोर, आष्टा और इछावर में बंटे इस जिले को अक्सर शान से वीवीआईपी जिला कहा जाता है, लेकिन विडम्बना देखिए कि जब-जब दिल्ली के उच्च सदन यानी राज्यसभा की टिकट बंटने की बारी आती है, तब-तब इस जिले के हिस्से में सिर्फ मायूसी या अनदेखी ही आती है।
उपचुनाव का कार्यक्रम
नामांकन की अंतिम तिथि: 2 नवंबर 2026
स्क्रूटनी: 3 नवंबर 2026
नाम वापसी: 5 नवंबर 2026
मतदान: 12 नवंबर 2026 प्रात: 9 से सायं 4 बजे तक
कार्यकाल: इस उपचुनाव में चुने जाने वाले नए सांसद का कार्यकाल 2 अ्रैल 2030 तक होगा।
आखिर क्यों पिछड़ जाता है सीहोर
राजनीतिक गलियारों के बीच अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि जिस जिले ने देश और प्रदेश को बड़े-बड़े सियासी धुरंधर दिए जो बड़े नेताओं की कर्मभूमि रहा हो, वहां का कोई स्थानीय नेता आज तक राज्यसभा की दहलीज तक क्यों नहीं पहुंच पाया।


