कुबेरेश्वरधाम में शरद पूर्णिमा पर उमड़ी आस्था, 30 हजार भक्तों ने पाई प्रसादी…

#Sehore, सीहोर। कुबेरेश्वरधाम में रविवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के इस खास मौके पर सुबह से ही धाम में देश के कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं के पहुंचने का तांता लगा रहा। एक तरफ जहां भगवान के अलौकिक स्वरूपों के दर्शन कर भक्तों ने धन्य महसूस किया, वहीं दूसरी तरफ विठलेश सेवा समिति की तरफ से आयोजित विशाल भंडारे में 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। महोत्सव के दौरान कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने श्रद्धालुओं को कर्तव्यपालन, सदाचार और निस्वार्थ कर्म का मार्ग दिखाया।
शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर रविवार शाम चार बजे से श्री मुरली मनोहर मंदिर में भगवान के विशेष और मनमोहक श्रृंगार किए गए। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने जानकारी दी कि इस विशेष अवसर पर भक्तों को एक ही जगह पर भगवान शिव के चंद्रमौली स्वरूप, प्रभु श्रीरामचंद्र और भगवान श्रीकृष्णचंद्र के दिव्य स्वरूपों के एक साथ अलौकिक दर्शन हुए। इस अद्भुत और भव्य श्रृंगार को निहारने के लिए मंदिर परिसर में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा धाम जयकारों से गूंज उठा।
30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पाई भोजन प्रसादी
कुबेरेश्वरधाम में आने वाले दूर-दराज के भक्तों के लिए विठलेश सेवा समिति की ओर से विशाल भोजन प्रसादी का भव्य प्रबंध किया गया था। सुबह से शुरू हुए इस सेवा कार्य में लगभग 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक भोजन प्रसादी ग्रहण की। प्रसादी में गरमागरम खिचड़ी, रोटी-सब्जी, नमकीन और मीठी नुक्ती परोसी गई। इस सेवा और व्यवस्था को संभालने में पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला समेत समिति के तमाम सेवादार मुस्तैदी से जुटे रहे।
कर्म और सदाचार ही सच्ची भक्ति है
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन के बेहद गहरे और प्रेरणादायक पाठ पढ़ाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए। केवल भगवान से सुख-समृद्धि मांगने से बात नहीं बनती, बल्कि इंसान को अपने आचरण और व्यवहार को भी श्रेष्ठ बनाना होगा।
पंडित मिश्रा ने आगे कहा कि जब व्यक्ति अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी, निष्ठा और अहंकार रहित भाव से निभाता है तो उसका कर्म भी भक्ति का जीवंत स्वरूप बन जाता है। जीवन में केवल पूजा-पाठ ही काफी नहीं है, बल्कि अच्छे कर्म, सच्चा आचरण और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने समझाया कि मन में अहंकार या ईष्र्या रखने वाला इंसान अपने असल मार्ग से भटक जाता है। इसलिए हर व्यक्ति को सत्य, प्रेमए विनम्रता और सदाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और निस्वार्थ भाव से समाज व परिवार के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
भक्ति, सेवा और सद्भाव का अनूठा संगम
शरद पूर्णिमा के इस पूरे आयोजन में एक तरफ जहां धार्मिक अनुष्ठानों और भगवान के भव्य दर्शनों की धूम रही, वहीं दूसरी तरफ सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव का एक अद्भुत संगम देखने को मिला।