#Sehore, सीहोर। जिले में प्रशासनिक पकड़ और सरकारी विभागों पर नियंत्रण रखने में भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय कोर कमेटी पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। भाजपा की जिला कोर कमेटी का मुख्य दायित्व और विजन यह होता है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिले में सही संचालन हो रहा है या नहीं, सरकारी महकमों में व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं या नहीं और यदि कहीं कोई लापरवाही दिखे तो उसकी सीधी फीडबैक सरकार तक पहुंचाई जाए ताकि समय रहते सुधार हो सके। परंतु सीहोर जिले में भाजपा कोर कमेटी का ऐसा कोई विजन दिखाई नहीं दे रहा है।
अधिकारियों पर लगाम न होने का सीधा असर अब जिले की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। जिले में जनशिक्षकों की मनमानी नियुक्ति का मामला हो या प्रभारियों के भरोसे चल रहे स्कूल, सीहोर की शिक्षा व्यवस्था अब राम भरोसे नजर आ रही है।
पोर्टल डेटा एंट्री में सीहोर प्रदेश में फिसड्डी
जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली उजागर हुई है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन पोर्टल पर डेटा एंट्री के मामले में सीहोर जिला पूरे मध्य प्रदेश में सबसे पीछे छूट गया है।
13 हजार से अधिक बच्चे ड्रॉप बॉक्स में कैद
पिछले शैक्षणिक सत्र में जिले में 2 लाख 66 हजार 463 विद्यार्थी दर्ज थे, जबकि इस सत्र में अब तक केवल 2 लाख 53 हजार 500 बच्चों का ही नामांकन हो सका है। 12 हजार 963 बच्चों का नामांकन लंबित है और 13 हजार 68 छात्र.छात्राएं अब भी पोर्टल के ड्रॉप बॉक्स में अटके हुए हैं। पिछली कक्षा या स्कूल बदलने वाले इन बच्चों का अगली कक्षा में ट्रांजिशन न होना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है।
1.33 लाख छात्रों का डेटा ही गायब
जिले के कुल 2 लाख 84 हजार 437 विद्यार्थियों में से मात्र 1 लाख 51 हजार 132 केवल 53 प्रतिशत की प्रोफाइल ही पूरी की जा सकी है यानी 1 लाख 33 हजार 305 (47 प्रतिशत) विद्यार्थियों की प्रोफाइल पोर्टल पर अधूरी पड़ी है, जिससे वे शासकीय योजनाओं और छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
आधे से ज्यादा स्कूलों में शिक्षकों का डेटा अधूरा
जिले के कुल 2225 स्कूलों में से महज 1056 (47 प्रतिशत) स्कूलों ने ही अपने शिक्षकों की प्रोफाइल पूरी की है। 1169 स्कूलों में यह काम ठप पड़ा है। जिले के 2225 स्कूलों में से सिर्फ 1629 स्कूलों की प्रोफाइल अपडेट हुई है, जबकि 596 स्कूलों का डेटा अब भी पेंडिंग है।
योजनाओं के लाभ पर मंडराया संकट
डेटा एंट्री में इस भयानक देरी का सीधा असर जिले के गरीब और जरूरतमंद बच्चों पर पड़ रहा है। यदि पोर्टल पर प्रोफाइल समय से अपडेट नहीं होती है तो विद्यार्थियों को मिलने वाली साइकिल, यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें और विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियों का वितरण लटक सकता है।
कोर कमेटी मौन
राज्य सरकार की छवि सुधारने और व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने का दावा करने वाली भाजपा की जिला कोर कमेटी इस पूरे प्रशासनिक ढर्रे पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकी है। जनहित से जुड़े इतने बड़े मामले में सत्ताधारी पार्टी का कोई विजन या प्रभावी कदम सामने न आना यह दर्शाता है कि सीहोर का सरकारी तंत्र पूरी तरह से भाजपा कोर कमेटी की पकड़ से बाहर हो चुका है।


