@सीहोर। काहेरी फिल्टर प्लांट पर मंगलवार शाम हुए जहरीली क्लोरीन गैस के रिसाव ने पूरे शहर को दहशत में डाल दिया। इस हादसे ने नगर पालिका प्रशासन व जल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस 600 किलो के सिलेंडर का वाल्व फटने से यह हादसा हुआ, वह पिछले 10 सालों से बिना किसी उपयोग के वहां पड़ा हुआ था। सवाल यह उठ रहा है कि नगर पालिका के पूर्व व वर्तमान अध्यक्ष और एक दर्जन सीएमओ इस बड़े खतरे से पूरी तरह अनजान कैसे रहे।
बता दें बीते 10 वर्षों में सीहोर नगर पालिका की कमान कई हाथों में रही। पूर्व अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा का कार्यकाल रहा, उनके बाद अमिता जसपाल सिंह अरोरा अध्यक्ष रहीं और वर्तमान में प्रिंस विकास राठौर को अध्यक्ष बने 4 साल हो चुके हैं। इस दौरान करीब 08 से 10 मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी बदले, लेकिन इतने वर्षों में जल प्रबंधन शाखा के मैदानी अमले या जिम्मेदार अधिकारियों ने किसी भी जनप्रतिनिधि या सीएमओ को यह अवगत कराना उचित नहीं समझा कि प्लांट पर अनुपयोगी और खतरनाक क्लोरीन गैस सिलेंडर रखा हुआ है।
10 साल से उपयोग ही नहीं हो रहा था क्लोरीन
नगर पालिका के इंजीनियर विजय कोली का कहना है कि शहर की जलापूर्ति में बीते 10 सालों से क्लोरीन का उपयोग किया ही नहीं जा रहा था, यह महज एक पुराना सिलेंडर था जिसमें थोड़ी-बहुत गैस बची थी। अब सवाल यह है कि अगर 10 साल से गैस का उपयोग बंद था तो इस रिस्क को वहां क्यों छोड़ा गया। क्या जल विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे थे।
खूंटी ठोककर सिलेंडर को पानी में डुबोया
मंगलवार शाम 600 किलो क्षमता वाले सिलेंडर का पीतल का वाल्व अचानक खराब हो गया था, जिससे पीले-हरे रंग की जहरीली गैस हवा में फैलने लगी। 4 ग्रामीणों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन हुई, वहीं एक दर्जन से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे। चूंकि एसडीईआरएफ की टीम केमिकल लीकेज से निपटने के लिए प्रशिक्षित नहीं थी, इसलिए गेल इंडिया की एक्सपर्ट टीम बुलाई गई। लगभग डेढ़ घंटे चले विशेष ऑपरेशन में वाल्व में खूंटी ठोककर रिसाव रोका गया और सिलेंडर को पानी में डुबो दिया गया।


