#सीहोर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर शुक्रवार को जिले भर में बैंक कर्मी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। बैंकों के मुख्य द्वारों पर लटके ताले और बंद दरवाजे देख उपभोक्ता निराश होकर खाली हाथ लौटने को मजबूर हो गए। हालांकि इस हड़ताल के समय को लेकर आम जनता में भारी नाराजगी देखने को मिली। बैंक पहुंचे उपभोक्ताओं का गुस्सा इस बात पर फूटा कि बैंककर्मियों ने आंदोलन के लिए शुक्रवार का ही दिन क्यों चुना?
शाखाओं के बाहर से लौट रहे आमजनों ने तीखा तर्क देते हुए कहा कि शुक्रवार को हड़ताल की गई, जबकि शनिवार और रविवार को बैंकों में नियमित अवकाश रहता है। ऐसे में बैंककर्मियों की रणनीति के कारण आम जनता का कामकाज लगातार तीन दिनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया। लोगों ने तर्क दिया कि यदि बैंककर्मी वाकई जनहित का थोड़ा भी ध्यान रखते तो वे मंगलवार, बुधवार या गुरुवार को हड़ताल करते। इससे उपभोक्ता अगले ही दिन अपने जरूरी काम निपटा पाते, लेकिन अब उन्हें सीधे सोमवार तक का लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
छुट्टियों की तुलना पर सवाल
उपभोक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी विदेशों की तर्ज पर 5-डे वीक की होड़ कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि भारत में होली, दिवाली, 2 अक्टूबर सहित दर्जनों त्योहारों व जयंतियों की राष्ट्रीय छुट्टियां मिलती हैं, जो विदेशों में नहीं होतीं। यदि सप्ताह में हर शनिवार छुट्टी दे दी गई तो किसी त्योहार की अतिरिक्त छुट्टी आने पर एक साथ कई दिनों तक बैंक बंद रहेंगे, जिससे आम नागरिक और व्यापारी पिस जाएंगे।
तीन दिन असर
बता दें यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर यह प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया जा रहा है। भले ही बैंककर्मियों की हड़ताल केवल एक दिन की है, लेकिन इसका असर आम जनता पर लगातार 3 दिनों तक पड़ेगा। भले ही हड़ताल केवल 1 दिन आज शुक्रवार की है, लेकिन इसका असर आम जनता को लगातार 3 दिनों तक झेलना पड़ेगा। शनिवार और रविवार को नियमित वीकली ऑफ/सरकारी छुट्टी है। नतीजतन, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट और कैश ट्रांजेक्शन से जुड़े तमाम बड़े काम अब सीधे सोमवार को ही हो सकेंगे।
दो शनिवार अवकाश
बता दें वर्तमान नियम महीने के केवल दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है, लेकिन यूनियन की मांग है कि हर शनिवार छुट्टी घोषित कर बैंकों में लागू हो 5-डे वीक। यूनियन ने शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार रोजाना 40 मिनट ज्यादा काम करने को तैयार। यूनियन का कहना है कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार पेंडिंग रख रही है। वार्ता का दौर बेनतीजा रहने के बाद बैंककर्मियों के पास हड़ताल के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
यह मांगे
पीएलआई योजना का विरोध: स्केल-4 और उससे ऊपर के अफसरों के लिए लागू नई पीएलआई योजना को भेदभावपूर्ण बताकर वापस लेने की मांग।
पेंशन और एनपीएस का मुद्दा: एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना लागू करना और पेंशन अपडेशन की समीक्षा।
भर्ती की मांग: बैंकों में क्लर्क, सब-स्टाफ और आम्र्ड गाड्र्स के खाली पड़े पदों पर तुरंत भर्ती की जाए।
चेतावनी, सितंबर के आखिरी हफ्ते में 5 दिन ताले
अगर सरकार ने अब भी सुध नहीं ली तो आने वाले दिनों में मुसीबत और बढ़ेगी, बैंक यूनियंस ने साफ कर दिया है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में फिर से बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि 26 और 27 सितंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी। जबकि 28 से 30 सितंबर तक लगातार 3 दिनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल रहेगी। यानी लगातार 5 दिनों तक बैंक पूरी तरह ठप रह सकते हैं।


