पिता शिव के दिन सोमवार को विराजेंगे पुत्र श्री गणेश…

#सीहोर। हिंदू पंचांगीय गणना के अनुसार इस वर्ष गणेश उत्सव बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। बालाजी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा के अनुसार नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा पंचांगीय मेल बन रहा है, जिससे भक्तों को बप्पा की भक्ति और सेवा के लिए 10 नहीं बल्कि पूरे 12 दिनों का समय मिलेगा।
पंडित शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को पड़ रही है, जो कि सोमवार का दिन है। सोमवार का दिन भगवान श्री गणेश के पिता भगवान शिव को समर्पित होता है। पिता और पुत्र के इस अद्भुत पंचांगीय संयोग से इस बार का गणेश उत्सव आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ, विशिष्ट और फलदायी माना जा रहा है।
14 से 25 सितंबर तक चलेगा उत्सव
पं. शर्मा के अनुसार सामान्यत: गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 तिथियों का होता है। हालांकि तिथियों की घट-बढ़ और गणना के कारण 14 सितंबर को गणपति स्थापना से लेकर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी विसर्जन तक कैलेंडर के अनुसार कुल 12 दिन बन रहे हैं।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 05.22 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, सुबह 07.14 बजे तक
14 सितंबर: गणेश स्थापना के शुभ मुहूर्त
मध्याह्न गणेश स्थापना अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12.09 बजे से 12रू58 बजे तक
गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त: दोपहर 11.20 बजे से 01.48 बजे तक
शाम की पूजा गोधूलि मुहूर्त: शाम 06.42 बजे से 07.05 बजे तक
स्थापना और पूजन के समय रखें इन बातों का ध्यान

  • मान्यता अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे मिथ्या कलंक लगने का भय रहता है। 14 सितंबर को सुबह 09.12 बजे से रात 08.58 बजे तक चंद्र दर्शन न करें।
  • घर या पांडाल के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्री गणेश की नई मूर्ति स्थापित करें।
  • स्थापना व दैनिक पूजन के दौरान श्री गणेश को दूर्वा, मोदक या बेसन के लड्डू, लाल गुड़हल के फूल, अक्षत और शमी पत्र अवश्य अर्पित करें।