#सीहोर। सीबीएसई स्कूलों में कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई नए पाठ्यक्रम के फेर में पूरी तरह उलझकर रह गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हुए कई महीने बीत जाने के बाद भी नौवीं कक्षा के गणित और सामाजिक विज्ञान की भाग-2 की पाठ्यपुस्तकें न तो बाजार में उपलब्ध हैं और न ही स्कूलों में मिल पा रही हैं।
स्थिति यह है कि विद्यार्थियों को भाग-1 की सभी किताबें भी काफी मशक्कत के बाद कुछ ही दिनों पहले पूरी मिल सकी हैं। अब दूसरे भाग की किताबों का इंतजार बना हुआ है, जबकि स्कूलों में आगे का सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। इस स्थिति से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के सामने समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
नए पाठ्यक्रम के कारण बिगड़ा गणित
नए शैक्षणिक सत्र से कक्षा नौवीं का पाठ्यक्रम बदला गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप एनसीईआरटी की नई पुस्तकों को लागू किया गया है। इसमें रटने की जगह योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। किताबों के नाम और विषयवस्तु भी बदले गए हैं, लेकिन इस बदलाव के बीच नई किताबों की समय पर छपाई और आपूर्ति नहीं हो पाई।
डिजिटल पढ़ाई बन रही सिरदर्द
अभिभावक लखन कलेसरिया और रोहित ठाकुर ने बताया कि गणित भाग-2 और सामाजिक विज्ञान भाग-2 की अधिकृत किताबें नहीं होने से बच्चे पीडीएफ और डिजिटल सामग्री के सहारे पढऩे को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है कि हर बच्चे के लिए मोबाइल से लगातार पढ़ाई करना संभव नहीं है। किताब सामने न होने से पढ़ाई की रफ्तार और बच्चों का ध्यान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब नए पाठ्यक्रम का फैसला पहले से तय थाए तो सत्र शुरू होने के साथ किताबें उपलब्ध क्यों नहीं कराई गईं।
दूसरे सेमेस्टर की तैयारी पर संकट
अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता आगामी दूसरे सेमेस्टर को लेकर है। चर्चा है कि भाग-2 की किताबें दीपावली के आसपास मिल पाएंगी। ऐसे में तब तक दूसरे भाग की कक्षाएं आधी से ज्यादा खत्म हो चुकी होंगी। कम समय में भारी-भरकम पाठ्यक्रम पूरा करने का दबाव सीधे बच्चों पर पड़ेगा, जिससे वार्षिक परीक्षा की तैयारी पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही बोर्ड की ओर से पहले सेमेस्टर की परीक्षाओं और आगे के शेड्यूल को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी न मिलने से भी असमंजस बना हुआ है।
शिक्षकों को भी आ रही परेशानी
किताबों की कमी का असर सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, बल्कि अध्यापकों पर भी पड़ रहा है। नया सिलेबस होने के कारण शिक्षकों को नए तरीके से लेसन प्लान तैयार करने पड़ रहे हैं। बिना अधिकृत किताब के व्यवस्थित ढंग से पढ़ाना उनके लिए भी मुश्किल साबित हो रहा है।


