#हीरा जेल में, पर लेगा विभाग से प्रशिक्षण…!

@सीहोर। स्वास्थ्य विभाग की अंधेरगर्दी और लचर कार्यप्रणाली का एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि ‘यहां कुछ भी संभव है’। फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट के आरोप में गिरफ्तार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निलंबित किया जा चुका रेडियोग्राफर हीरा सिंह कौशल इस वक्त जेल में सलाखों के पीछे है, लेकिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रशिक्षण सूची में उसका नाम शान से शामिल है।
सीएमएचओ कार्यालय से जारी ट्रेनिंग लिस्ट में हीरा सिंह कौशल को बाकायदा रेडियोग्राफर बताते हुए बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ दर्शाया गया है। सूची में 18वें नंबर पर उसका नाम दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस कार्रवाई के तुरंत बाद विभाग उसे निलंबित कर चुका है, फिर भी प्रशिक्षण के लिए जारी सूची में उसकी वर्तमान पदस्थापना और सेवा स्थिति को अपडेट नहीं किया गया। इससे विभाग की रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया और कागजी निगरानी व्यवस्था की पोल खुल गई है।
फर्जी डॉक्टर बनाने का मास्टरमाइंड है हीरा सिंह
बता दें हीरा सिंह कौशल पर फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार करने और सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़ा कराने का गंभीर आरोप है। दमोह पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संजीवनी क्लीनिकों में कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर कई लोगों को डॉक्टर की नौकरी दिलाई गई थी। जांच के दौरान एक दर्जन से ज्यादा फर्जी डॉक्टरों के नाम उजागर हुए हैं। इतना ही नहीं मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार कार्यालय में भी हीरा सिंह के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
जेल में बंद निलंबित कर्मचारी को ट्रेनिंग देने की तैयारी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हीरा सिंह की गिरफ्तारी और निलंबन की सूचना सीएमएचओ कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंची थी। यदि सूचना थी तो सूची तैयार करते समय इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। क्या यह केवल रिकॉर्ड अपडेट की सामान्य मानवीय भूल है या इसके पीछे अधिकारियों की साठगांठ है।