Sehore News: सीहोर। जिले के शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई लडऩे का दावा करने वाले चार-चार शिक्षक संगठन आज पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सीहोर जिले में जनशिक्षक और अकादमिक समन्वयक भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है, लेकिन शिक्षकों के हक में आवाज बुलंद करने वाले ये संगठन सिर्फ मूकदर्शक बने हुए हैं। नतीजतन 6 से 18 सालों से मलाईदार कुर्सियों पर जमे पुराने जनशिक्षकों का कब्जा बरकरार है और नए योग्य शिक्षक अपने हक के इंतजार में दर-दर भटक रहे हैं।
राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल ने 24 जून को आदेश जारी कर 25 जुलाई तक वरिष्ठता सूची और 5 अगस्त को काउंसलिंग कराकर 20 अगस्त तक पदस्थापना के निर्देश दिए थे। सत्र 2026-27 के लिए प्रत्येक विकासखंड में 5 अकादमिक समन्वयक 2 विज्ञान, 1 सामाजिक विज्ञान, 2 भाषा तथा प्रति 10 स्कूलों पर 1 जनशिक्षक की नियुक्ति होनी थी। लेकिन 20 अगस्त की समय-सीमा बीतने के बाद भी सीहोर शिक्षा विभाग सोता रहा। हैरानी की बात यह है कि जिले के चारों शिक्षक संगठन इस प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ उग्र रुख अपनाने के बजाय सुस्त पड़े हैं।
20 दिन में सिर्फ ज्ञापन का नाटक, ठोस कार्रवाई शून्य
भर्ती प्रक्रिया में गड़बडिय़ों को लेकर प्रांतीय शिक्षक संघ ने 4 अगस्त को जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। अफसरों ने भोपाल से मार्गदर्शन मांगने की बात कही, लेकिन 20 दिन बाद भी कोई मार्गदर्शन नहीं मांगा गया। सवाल यह उठता है कि जिले में सक्रिय चार-चार संगठन इस टालमटोल पर चुप क्यों हैं? क्या संगठनों की यह लाचारी केवल औपचारिकता पूरी करने तक सीमित है।
हक मारने की विभागीय साठगांठ
जिले में पिछले कई वर्षों से नई पदस्थापना न होने के कारण पुराने जनशिक्षक 6 से 18 सालों से अपनी सीटों पर जमे हुए हैं। शिक्षक संगठनों की चुप्पी और विभाग की मेहरबानी के चलते योग्य माध्यमिक और उच्च श्रेणी शिक्षकों का हक मारा जा रहा है। इसके अलावा 2014 के शिक्षकों की 12 वर्ष की क्रमोन्नति, 2021 भर्ती के लंबित एरियर और वेतनवृद्धि जैसे गंभीर मुद्दे भी संगठनों की ढिलाई के कारण ठंडे बस्ते में पड़े हैं।


