सीहोर। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने के मामले में सियासत और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। इस पूरी घटना पर केंद्रीय कृषि मंत्री और सांसद शिवराज सिंह चौहान ने गहरी नाराजगी जताई और पीडि़तों के साथ धरने पर बैठ गए, लेकिन इसके बावजूद वन विकास निगम अपनी कार्रवाई पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। महकमे ने दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों और वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है।
घटना रविवार दोपहर करीब 2 बजे की है, जब वन विकास निगम का अमला भारी पुलिस बल के साथ कोसमी गांव पहुंचा। देखते ही देखते जेसीबी मशीनों ने बरेला समुदाय के करीब 12 कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया। सिर्फ आशियाने ही नहीं उजाड़े गए, बल्कि खेतों में लहलहाती मक्का की फसल को भी रौंद दिया गया और पीने के पानी के कुओं तक को मिट्टी भरकर पूर दिया गया। अपना सब कुछ लुटता देख आदिवासी महिलाएं छाती पीट-पीटकर रोने लगीं। बेघर हुए परिवारों ने अपने मासूम बच्चों को सुलाने के लिए पास के पेड़ों पर कपड़े के झूले बांधे और पूरी रात खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में बिताई।
शिवराज की नाराजगी, मौके पर दिया धरना
मामले की भनक लगते ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शाम को फौरन कोसमी गांव पहुंचे। रोती-बिलखती महिलाओं और बच्चों का दर्द देखकर वे भावुक हो गए और खुद जमीन पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मुख्य सचिव को फोन लगाकर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उनके क्षेत्र में जुल्म की इंतिहा हुई है। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत प्रभावितों के रहने-खाने का इंतजाम करने और नए मकान बनाकर देने के सख्त निर्देश दिए।
वन विकास निगम अपनी बात पर अडिग
एक तरफ जहां देश के कद्दावर केंद्रीय मंत्री आदिवासियों के समर्थन में धरने पर बैठे और प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी तरफ वन विकास निगम के सीहोर डीएफओ तरुण कुमार ने इस पूरे मामले में स्पष्ट किया है कि निगम ने किसी नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। वन विभाग का पक्ष रखते हुए डीएफओ ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि लाडक़ुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट के कक्ष क्रमांक 426 में 183 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है, जहां वर्ष 2021 में पौधरोपण किया गया था। इस आरक्षित भूमि के लगभग 32 हेक्टेयर हिस्से पर वर्ष 2022 से अतिक्रमण किया गया था, जिसे हटाने के लिए यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है।


