@सीहोर। कुबेरेश्वर धाम में भगवान शिव का जल अभिषेक कर वापस दिल्ली लौट रहे एक परिवार पर उस वक्त अचानक आफत आ पड़ी, जब मालवा एक्सप्रेस में सफर के दौरान 24 वर्षीय युवक की अचानक तबीयत बिगड़ गई। युवक को लगातार उल्टियां और चक्कर आने लगे, जिससे वह खड़ा होने की स्थिति में भी नहीं रहा। परिजनों द्वारा चेन पुलिंग कर ट्रेन रोकने के बाद ट्रेन के गार्ड और सह यात्रियों की सूझबूझ व इंसानियत के चलते मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सका।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का मूल निवासी परिवार वर्तमान में दिल्ली में निवास करता है। परिवार के सदस्य सीहोर स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में भगवान महादेव पर जल चढ़ाने और दर्शन पूजन के लिए आए हुए थे। दर्शन के उपरांत पूरा परिवार सीहोर रेलवे स्टेशन से मालवा एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर दिल्ली वापस लौट रहा था। बीमार युवक की पहचान 24 वर्षीय गौरव के रूप में हुई है।
एस-6 कोच में बिगड़ी तबीयत
जैसे ही ट्रेन सीहोर से आगे बढ़ी एस-6 कोच में सवार गौरव की अचानक तबीयत ज्यादा खराब हो गई। अत्यधिक उल्टियां होने के कारण वह अचेत जैसी स्थिति में आ गया। उसके साथ केवल उसकी मां और बहन थीं, जो अकेले असहाय महसूस कर रही थीं। घबराए परिजनों ने यार्ड के पास चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। लोको पायलट ने तुरंत गार्ड पीक सिंह को सूचना दी कि एस-6 कोच में एक यात्री को इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है।
मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता
निशातपुरा स्टेशन के पास जब ट्रेन रुकी तो गार्ड पीके सिंह मौके पर पहुंचे। मां और बहन का कहना था कि वे अकेले बीमार युवक को कोच से उतारकर मुख्य सडक़ तक कैसे ले जाएंगे, इसलिए ट्रेन में ही डॉक्टर या एंबुलेंस बुलाई जाए। इस पर गार्ड पीके सिंह ने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा आप ट्रेन को आगे ले जाने की चिंता बिल्कुल न करें, पहले मरीज को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। ट्रेन को मैं खुद रोके रखूंगा।
करीब आधे घंटे रुकी रही ट्रेन
गार्ड के आश्वासन के बाद ट्रेन में सवार चार-पांच अन्य यात्रियों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्होंने मिलकर युवक गौरव को कोच से सुरक्षित नीचे उतारा और पास में खड़े अन्य वाहनों के रास्ते से होते हुए मुख्य सडक़ पर खड़े ऑटो तक पहुंचाया। इस पूरे रेस्क्यू और मदद के सिलसिले में मालवा एक्सप्रेस करीब आधे घंटे तक स्टेशन पर खड़ी रही।
हमीदिया अस्पताल में जारी है इलाज
युवक को ऑटो की मदद से तत्काल भोपाल के हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। परिजनों ने संकट के समय मदद करने वाले मालवा एक्सप्रेस के गार्ड पीके सिंह, रेलवे स्टाफ और सह यात्रियों का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय पर यह मदद नहीं मिलती तो कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी।


