#Sehore, सीहोर। जिले के कोसमी गांव में आदिवासियों का धरना प्रदर्शन पांचवें दिन भी पूरी तन्मयता और कड़े तेवरों के साथ जारी है। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए और प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए बुधवार को खुद कलेक्टर और कमिश्नर मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन फिलहाल इस विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
धरना स्थल पर पहुंचे कमिश्नर और कलेक्टर के साथ एसडीएम और टीआई भी मौजूद थे। प्रशासन ने चाहा कि पीडि़त परिवार और प्रदर्शनकारी पंचायत भवन में आकर बातचीत करें। हालांकि पीडि़त परिवार ने अधिकारियों की इस पंचायत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। परिवार और समर्थकों का दो टूक कहना था कि वे धरना स्थल को छोडक़र कहीं नहीं जाएंगे, जिसे भी बात करनी है, वह यहीं धरना स्थल पर आए। बाद में एसडीएम और टीआई की विशेष समझाइश के बाद दो स्थानीय लोग ग्राम पंचायत पहुंचे और वहां कलेक्टर व कमिश्नर के समक्ष अपनी बात रखी। हालांकि इस लंबी चर्चा के बाद भी विवाद का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया।
प्रशासन के जवाब से संतुष्ट नहीं प्रदर्शनकारी
धरने पर बैठे लोगों का आरोप है कि पिछले पांच दिनों से वे संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर अब तक कोई संतोषजनक जवाब या स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है। इसी उदासीनता के चलते आदिवासियों और प्रदर्शनकारियों में भारी रोष व्याप्त है। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे गुरुवार सुबह ठीक 8 बजे 10 से 15 हजार लोगों के साथ पैदल मार्च निकालते हुए राजधानी भोपाल की ओर कूच करेंगे और सीधे मुख्यमंत्री आवास के सामने पहुंचकर अपनी बात रखेंगे।
कमिश्नर बोले- तथ्यों की जांच के बाद बनेगी रिपोर्ट
मौके पर पहुंचे कमिश्नर ने मीडिया और स्थानीय लोगों से चर्चा करते हुए बताया कि वे शासन के निर्देश पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने आए हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पीड़ित परिवारों और अन्य ग्रामीणों से बातचीत की है। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के तथ्यों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अतिक्रमण से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन यह पड़ताल कर रहा है कि संबंधित परिवारों के पास गांव में रहने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक जगह है या वे पूरी तरह से इसी अतिक्रमित जमीन पर ही निर्भर हैं। कमिश्नर ने आश्वस्त किया कि वे खुद मौके पर पहुंचे हैं और वहां के जमीनी हालातों से पूरी तरह अवगत हो चुके हैं।


