असरदार पुलिस पंचायत, बुजुर्गों की चौपाल में सुलझे रिश्तों और धोखाधड़ी के पेच

#Sehore, सीहोर। कानून का चाबुक जब चलता है, तब सिर्फ डर पैदा होता है, लेकिन जब खाकी में हमदर्दी और वरिष्ठों के प्रति सम्मान जुड़ता है तो बरसों से उलझे पारिवारिक और आर्थिक विवाद मिनटों में सुलझ जाते हैं। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देशन में आयोजित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की बुधवार को बैठक कुछ ऐसी ही मिसालों की साक्षी बनी, जहां पुलिस की चौखट पर पहुंचते ही कई जटिल मामले बिना किसी लंबे अदालती मुकदमे के चुटकियों में निपट गए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में कोर कमेटी सदस्य अनिल पालीवाल, साधु राम शर्मा, कमल सिंह ठाकुर और विपुल चांडक मौजूद रहे। पंचायत के सामने आए मामले न केवल समाज का असली चेहरा उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि सही परामर्श से बड़े-बड़े विवाद कैसे टल सकते हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे ने बताया कि कुछ पुलिस पंचायत में कुल छह प्रकरण आए थे।

  1. थाने के नाम से ही बदला बेटे का मिजाज
    सीहोर शहर के एक बुजुर्ग पिता के लिए शराब के नशे में धुत बेटे की गालियां और रोज-रोज का क्लेश नियति बन चुका था। परेशान होकर पिता ने पुलिस पंचायत का रुख किया। लेकिन इस चौपाल का असर ऐसा हुआ कि सुनवाई की तारीख आने से पहले ही बेटा घुटनों पर आ गया। उसने पिता से माफी मांगी और आइंदा कभी परेशान न करने का प्रण लिया। सुनवाई के दिन बुजुर्ग पिता ने नम आंखों से पंचायत को धन्यवाद दिया और कहा कि पंचायत का सिर्फ बुलावा ही मेरे लिए खोया हुआ सम्मान वापस ले आया।
    10 लाख का जमीनी सौदा और दीवाली का अल्टीमेटम
    ग्रामीण अंचल से आए एक सीनियर सिटीजन ने 10 लाख रुपये में जमीन का सौदा तय किया था। रकम देने के बाद पता चला कि विक्रेता की माली हालत ठीक नहीं है और जमीन बेचना संभव नहीं है। सौदा रद्द हुआ, पर रकम वापस करने में विक्रेता हीला-हवाली करने लगा। पंचायत ने अनावेदक को दोटूक समझाया कि कानूनी दांव-पेच में दोनों का समय और पैसा बर्बाद होगा। आखिरकार सर्वसम्मति से तय हुआ कि दिवाली तक पाई-पाई वापस की जाएगी, वरना वैधानिक कार्रवाई तय है।
    हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर ठगी की कोशिश पर ब्रेक
    शहर की एक बुजुर्ग महिला से प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट ने झूठे वादे कर 10 हजार रुपये जमा करा लिए थे। एजेंट का दावा था कि दो साल बाद हर साल पैसे वापस मिलेंगे, लेकिन बाद में उसने 30 हजार रुपये और ऐंठने की मांग रख दी। पंचायत ने जब कागजात खंगाले तो पता चला कि यह एक सीधी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, जिसमें रिफंड का कोई नियम ही नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत ने अनावेदक एजेंट-कंपनी प्रतिनिधि को सभी मूल दस्तावेजों के साथ अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का समन जारी किया है।
    75 साल के बुजुर्ग का खेत छुड़ाया, मकान पर कागजी जंग जारी
    रहटी क्षेत्र के 75 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी बहन की कृषि भूमि पर उनके ही भतीजे ने अनधिकृत कब्जा कर रखा था। अनावेदक भतीजे ने शर्त रखी कि बुजुर्ग यदि उसके ताऊ वाला मकान खाली कर दें तो वह खेत छोड़ देगा। पंचायत ने स्पष्ट किया कि मकान के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के दावे उलझे हुए हैं, लेकिन बुजुर्ग की खेती की जमीन पर कब्जा पूरी तरह गलत है। पंचायत के कड़े रुख के बाद भतीजा खेत का कब्जा लौटाने को तैयार हो गया। पुलिस प्रशासन ने बुजुर्ग को जमीन पर शांतिपूर्वक खेती शुरू कराने के लिए मौके पर सहायता देने का भरोसा दिया है।