सीहोर। ग्राम पंचायत चुनावों की सरगर्मी के बीच जिले का राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। आगामी 5 से 6 महीनों में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं और इसी चुनावी सुगबुगाहट के बीच जिला प्रशासन का एक कड़ा फरमान सरपंचों के लिए गले की फांस बन गया है। खातेगांव में शराब माफिया द्वारा टीआई की हत्या की दर्दनाक घटना के बाद जागा जिला प्रशासन अब सीहोर जिले की सभी 542 ग्राम पंचायतों में अवैध शराब पर लगाम कसने के लिए सरपंचों और सचिवों को मुखबिर बनाने जा रहा है। लेकिन इस आदेश ने सरपंचों के सामने ऐसा दोहरा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है, जहां एक तरफ कुआं है तो दूसरी तरफ खाई।
बता दें गांवों में अमूमन सीमित मतदाता होते हैं, जहां एक-एक वोट जीत-हार तय करता है। यदि सरपंच अपने गांव में अवैध शराब बेचने वाले किराना दुकानों, ढाबों या अवैध तस्करों की शिकायत प्रशासन से करते हैं तो उन दुकानदार परिवारों और उनके समर्थकों से सरपंच की सीधी बुराई हो जाएगी। चुनाव के इस नाजुक समय में कोई भी जनप्रतिनिधि अपने ही गांव के परिवारों से सीधी बुराई मोल लेकर अपना वोट बैंक नहीं बिगाडऩा चाहता।
महिला मतदाताओं की नाराजगी का डर
दूसरी ओर गांवों में अवैध शराब और कच्ची शराब के कारण सबसे ज्यादा परेशान महिलाएं होती हैं। आए दिन ग्रामीण महिलाएं शराब बिक्री के विरोध में सडक़ों पर उतरती हैं। यदि सरपंच आबकारी विभाग को सूचना नहीं देते और गांव में अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है तो गांव की आधी आबादी यानी महिला मतदाता सरपंच से सीधे नाराज हो जाएंगी। महिला मतदाताओं का एकमुश्त विरोध किसी भी प्रत्याशी की चुनावी नैया डुबोने के लिए काफी है। सरपंचों के सामने परेशानी यह है कि अगर शिकायत करें तो शराब बेचने वाले परिवारों से दुश्मनी और अगर चुप्पी साधें तो गांव की महिलाओं का भारी आक्रोश का सामना चुनावों में करना होगा।
शराब बांटने का आरोप, अब मुखबरी
यह स्थिति इसलिए भी बेहद दिलचस्प हो गई है क्योंकि ग्रामीण राजनीति में अक्सर पंचायत चुनावों के दौरान उम्मीदवारों पर मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब बांटने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार हवा का रुख बिल्कुल उलट है। जिन जनप्रतिनिधियों पर शराब बांटने के आरोप लगते थे, अब प्रशासन ने उन्हीं के कंधों पर अवैध शराब बंद कराने और मुखबरी करने की जिम्मेदारी डाल दी है।
खातेगांव कांड के बाद एक्शन में प्रशासन
कलेक्टर बालगुरु के. ने जिला पंचायत सीईओ और सभी एसडीएम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गांवों में चोरी-छिपे, फेरी लगाकर, एजेंटों या डायरी सिस्टम से बिकने वाली शराब की जानकारी मिलते ही सरपंच-सचिव तुरंत आबकारी विभाग को सूचित करें।
पांचों विकासखंडों में नियम लागू
सीहोर: 154 ग्राम पंचायतें
आष्टा: 144 ग्राम पंचायतें
भैरूंदा: 101 ग्राम पंचायतें
इछावर: 77 ग्राम पंचायतें
बुधनी: 66 ग्राम पंचायतें
शिकायत दर्ज कराने के लिए जारी हुए नंबर
राजेश विश्वकर्मा जिला आबकारी अधिकारी: 8839222705, 9098389100
संगीता नायक सहायक जिला आबकारी अधिकारी: 9406580599
माधव कुंडल आबकारी उपनिरीक्षक: 9098389100
रिया जैन आबकारी उपनिरीक्षक: 9981477898


