#Sehore, सीहोर। शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और विद्यालय की प्रगति के सच्चे पथदर्शक होते हैं। इस कथन को शासकीय माध्यमिक शाला कौडिय़ाछीतू के प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना और उनके समर्पित स्टाफ ने पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है।
डिजिटल शिक्षा में आ रही बिजली की गंभीर बाधा को दूर करने के लिए प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना ने किसी सरकारी बजट या प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय स्वयं आगे बढक़र नेतृत्व किया। उनके इस प्रेरणादायक कदम और आपसी सहयोग से जुटाई गई राशि से अब विद्यालय में स्थायी विद्युत आपूर्ति बहाल हो गई है।
समस्या पर रोने के बजाय समाधान के बने नायक
शासकीय माध्यमिक शाला कौडिय़ाछीतू में विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। हालांकि पास में बिजली का खंभा होने के बावजूद पिछले काफी समय से विद्यालय में 90 प्रतिशत समय बिजली बंद रहती थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई बार-बार बाधित हो रही थी। बार-बार की शिकायतों के बाद भी जब समस्या हल नहीं हुई, तब प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना ने अपनी प्रशासनिक सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। उन्होंने समस्या पर हाथ पर हाथ धरकर बैठने के बजाय खुद पहल की और पूरे स्टाफ को एकजुट कर करीब 8000 रुपये की राशि जुटाई।
800 फीट दूर से बिछाई केबल, बच्चों को दिया उपहार
प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना के मार्गदर्शन में विद्यालय से लगभग 800 फीट दूर स्थित नई डीपी से स्कूल तक 800 फीट लंबी केबल बिछवाई गई। इस प्रयास से अब स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट, पेयजल व्यवस्था, कक्षाओं में पंखे और लाइट सुचारु रूप से चलने लगे हैं।
इन शिक्षकों का रहा सहयोग
इस कार्य में प्रधान अध्यापक संजय सक्सेना के साथ शिक्षक शैलेंद्र सिंह, देवेंद्र चौहान, देवकरण मालवीय, शशिकला पांडे, फूलवती सेन, माधुरी जोशी एवं शशिवाला नामदेव ने कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया।


