पति सीमा पर हुए शहीद, #कान्हा ने वीरांगना के हाथों पर रख दिया माखन, 35 सालों से जारी है का चमत्कार

सीहोर। शौर्य, शहादत और अटूट भक्ति का ऐसा अलौकिक संगम आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। जब देश की रक्षा करते हुए पति सीमा पर वीरगति को प्राप्त हो गए तो गम के घने अंधेरे में डूबी एक वीरांगना ने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। इसके बदले में भगवान कान्हा ने भी अपनी इस अनन्य भक्त पर ऐसा आशीर्वाद बरसाया कि आज पूरा मध्य प्रदेश हतप्रभ है।
जिले की इछावर तहसील का छोटा सा गांव मोलगा आज केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और कौतूहल का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां की 53 वर्षीया साध्वी सुनीता वर्मा (सुनीता बाई) की हथेलियों पर पिछले 35 वर्षों से रोज सुबह अपने आप ताजा माखन प्रकट हो रहा है।
सुहाग उजड़ा तो कान्हा को माना अपना सबकुछ
साध्वी सुनीता बाई की यह जीवन यात्रा केवल चमत्कार की कहानी नहीं, बल्कि गहरे त्याग और भक्ति की मिसाल है। साल 1990-91 में उनका विवाह भोपाल के नरेला निवासी सीआरपीएफ जवान ओमप्रकाश वर्मा से हुआ था। हाथों की मेहंदी का रंग अभी ठीक से छूटा भी नहीं था कि जम्मू-कश्मीर में देश की सेवा करते हुए उनके पति शहीद हो गए।
कम उम्र में पति की शहादत से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन इस असहनीय दुख और पारिवारिक परिस्थितियों से टूटने के बजाय उन्होंने संन्यास का कठिन मार्ग चुना। वे अपने मायके मोलगा लौट आईं, सांसारिक सुखों का त्याग किया और पूरी तरह कान्हा की भक्ति में डूब गईं। करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने निजी खर्च से गांव में ही एक भव्य और सुंदर राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया, जहां रहकर वे आज साध्वी जीवन जी रही हैं।
तुम मेरी गोपी हो…
15 साल की उम्र से ही कान्हा के प्रेम में लीन सुनीता बाई बताती हैं कि बचपन में भगवान श्रीकृष्ण ने उनके सपने में आकर उन्हें दर्शन दिए थे। भगवान ने उनसे कहा था, सारी गोपियां मुझसे माखन छीनकर खाती थींए इसलिए मैं तुम्हें माखन का वरदान देता हूं।ष्
साध्वी जी का दावा है कि उसी दिन से जब भी वे लड्डू गोपाल का ध्यान लगाती हैं, भजन-कीर्तन करती हैं या श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करती हैं तो उनकी दोनों हथेलियों पर सुगंधित और ताजा मक्खन स्वत: ही आ जाता है। रोज सुबह 9 बजे पूजा और गीता पाठ समाप्त होने के बाद वे इस माखन को वहां मौजूद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांट देती हैं।
मोलगा बना मिनी गोकुल
रोज सुबह 9 बजे होने वाली इस अद्भुत पूजा और माखन प्रकटीकरण के दृश्य को अपनी आंखों से देखने के लिए मोलगा गांव में रोज मेले जैसा माहौल रहता है। आम दिनों के साथ-साथ जन्माष्टमी पर तो यहां श्रद्धालुओं का महासैलाब उमड़ पड़ता है।
श्रद्धालु इसे भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीला का प्रत्यक्ष चमत्कार मानते हैं तो वहीं ग्रामीण इसे एक शहीद की वीरांगना की निश्छल और अटूट भक्ति का फल मानते हैं। कारण चाहे जो भी हो 53 वर्षीय साध्वी सुनीता बाई की यह अमर भक्ति कथा आज हर किसी के दिल को छू रही है।