सीहोर। मां नर्मदा के पावन तट, हाथों में पूजन सामग्री, जल में अर्पित होती श्रद्धा की अंजलि और पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करते श्रद्धालु। पितृ मोक्ष अमावस्या पर जिले के नर्मदा घाटों पर ऐसा ही भक्तिमय दृश्य देखने को मिला। आंवलीघाट, नीलकंठ, छीपानेर, सातदेव और बुधनी सहित प्रमुख तटों पर सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 11 बजे तक करीब 4 लाख श्रद्धालुओं के आस्था की डुबकी लगाने की जानकारी सामने आई। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के साथ पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा तथा यातायात के व्यापक इंतजाम किए।
दो दिन पहले से पहुंचने लगे थे श्रद्धालु
पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर जिले के प्रमुख नर्मदा घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला दो दिन पहले से ही शुरू हो गया था। शनिवार सुबह होते-होते घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। आंवलीघाट, नीलकंठ और छीपानेर के साथ बुधनी क्षेत्र के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में स्नान कर पुण्य लाभ की कामना की। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने विधि-विधान से पूजन किया और अपने दिवंगत परिजनों का स्मरण करते हुए जल अर्पित किया।
पितरों की शांति के लिए तर्पण
हिंदू धर्म में आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व है। जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जो किसी कारणवश पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाते, वे इस दिन अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल अर्पित कर पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई लोगों ने सामथ्र्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री का दान भी किया।
संगम स्थल पर उमड़ी भीड़
प्रसिद्ध आंवलीघाट धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। नर्मदा और हथनूर नदी के संगम स्थल के रूप में इसकी विशेष पहचान है। पितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। घाट पर स्नान, पूजन और तर्पण के लिए लोगों की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर केवल धार्मिक परंपरा निभाने का नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को भावपूर्ण स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी रहा।
घाटों पर बैरिकेडिंग, नदी में उतरने के लिए निर्धारित सीमा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और नदी में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आंवलीघाट पर विशेष व्यवस्थाएं की गईं। नर्मदा तट से करीब 15 से 20 फीट की दूरी पर बैरिकेड्स लगाए गए, ताकि श्रद्धालु निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में रहकर स्नान कर सकें। घाटों पर एसडीआरएफ के विशेष बल, गोताखोरों और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का उद्देश्य स्नान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।
300 से अधिक जवानों की तैनाती
भीड़ के कारण यातायात प्रभावित न होए इसके लिए पुलिस ने रूट डायवर्जन और पार्किंग की व्यवस्था की। यातायात प्रभारी बृजमोहन धाकड़ के अनुसार शुक्रवार दोपहर 12 बजे से सलकनपुर मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया था। ऐसे वाहनों को मालीबायां और बुधनी की ओर से निर्धारित वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस, होमगार्ड, विशेष सशस्त्र बल और ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों सहित 300 से अधिक जवान तैनात किए गए।
चार स्थानों पर पार्किंग, वापसी के लिए वैकल्पिक मार्ग
आंवलीघाट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए मछवाई भवन के पास, केसरिया ढाबे के पीछे मरदानपुर रोड पर, गजीद रोड के समीप और ओवरब्रिज के पास पार्किंग स्थल बनाए गए। स्नान और पूजन के बाद वापसी के लिए वाहनों को मरदानपुर रोड, मांजर कुई और नया गांव जोड़ होते हुए रेहटी की ओर डायवर्ट करने की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्गों और पार्किंग स्थलों का उपयोग करने की अपील की गई, ताकि यातायात सुचारू बना रहे।
सलकनपुर में भी बढ़ी चहल-पहल
पितृ मोक्ष अमावस्या के साथ रविवार 11 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाली शारदीय नवरात्रि को लेकर प्रसिद्ध शक्तिपीठ सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम में भी भक्तों की चहल-पहल बढ़ गई। नर्मदा घाटों पर पितरों के प्रति श्रद्धा और देवी धाम में मां के दर्शन की तैयारी ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक वातावरण से भर दिया। आस्था, परंपरा और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पूर्वजों की शांति तथा परिवार के मंगल की कामना की।


