#Sehore, सीहोर। यदि आप सीहोर शहर के बाजारों में खरीदारी के लिए निकले और डिजिटल पेमेंट के भरोसे थे तो आपको जेब से नकदी निकालनी पड़ी होगी। 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर लगने वाले 0.4 प्रतिशत एमडीआर चार्ज के विरोध में व्यापार महासंघ सीहोर के आह्वान पर बुधवार को पूरे शहर में नो-यूपीआई डे मनाया गया। इस दौरान शहरभर के व्यापारियों ने न तो ग्राहकों से ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार किया और न ही खुद यूपीआई के जरिए कोई भुगतान किया।
व्यापार महासंघ द्वारा आयोजित इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के तहत शहरभर की दुकानों, संस्थानों और शोरूम के बाहर लगे यूपीआई क्यूआर कोड/स्कैनर्स को काले कपड़े से ढक दिया गया। सभी व्यापारियों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
क्यों नाराज हैं व्यापारी, क्या है नया नियम
व्यापारियों के इस कड़े कदम और आक्रोश की मुख्य वजह 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा नया सरकारी नियम है, जिसमें नए नियम के तहत 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट से 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया है। बड़े लेन-देन करने पर व्यापारियों को अधिकतम 300 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क अपनी जेब से चुकाना पड़ेगा।
थोक कारोबारियों का गणित बिगड़ा
थोक किराना, कपड़ा, तेल और अनाज व्यापारियों का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर उनके व्यापार और जेब पर भारी चपत लगाएगा। थोक व्यापार कम मार्जिन पर चलता है। ऐसे में यदि कोई व्यापारी दिनभर में 2000 रुपये से अधिक के सिर्फ 10 से 15 ट्रांजेक्शन भी स्वीकार करता हैए तो उसे प्रतिदिन हजारों रुपये का बेवजह शुल्क देना पड़ेगा।
डिजिटल इंडिया के विरोधी नहीं
व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे डिजिटल इंडिया या ऑनलाइन पेमेंट व्यवस्था के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं हैं। यूपीआई अब आम जनता और व्यापारियों की आदत बन चुका है। लेकिन लेन-देन पर अतिरिक्त चार्ज थोपना छोटे और बड़े दोनों तरह के कारोबारियों के अस्तित्व के लिए खतरा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो आगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा।


