करोड़ों का भवन, आधुनिक मशीनें पर डॉक्टर नदारद, सिविल अस्पताल में बीएमओ खुद संभाल रहे ओपीडी

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सीहोर। वीवीआईपी कहे जाने वाले विधानसभा क्षेत्र बुदनी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के हालात बदतर है। तहसील मुख्यालय पर स्थित करोड़ों की लागत से बना भव्य सिविल अस्पताल इन दिनों ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। अस्पताल में आधुनिक मशीनरी और दर्जनों वाहन तो मौजूद हैं, लेकिन सबसे अहम किरदार यानी डॉक्टर ही गायब हैं। यह चौंकाने वाली हकीकत खुद ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. डी. बड़ोदिया ने स्वीकार की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बॉन्ड वाले डॉक्टर अस्पताल छोडक़र चले गए हैं और फिलहाल वे खुद ही मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं।
बता दें अस्पताल में अव्यवस्थाओं का चरम नजारा पर है। शुक्रवार की शाम 5.30 बजे तक ओपीडी में मरीज पर्ची कटवाकर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा। स्थिति यह रही कि पूरी रात अस्पताल बिना किसी डॉक्टर के ही चलता रहा। रात 9 बजे जब अस्पताल का जायजा लिया गया तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने दो टूक कहा ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं है, बीएमओ साहब से बात कीजिए।
इलाज मिला न राहत, खाली हाथ लौटे मरीज
ओपीडी परिसर में दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार बच्चे घंटों दर्द से कराहते रहे। जब कोई डॉक्टर नहीं आया तो कई मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए। बिगड़ते हालात देख अंतत: बीएमओ डॉ. डी. बड़ोदिया को स्वयं अस्पताल पहुंचकर ओपीडी संभालनी पड़ी। उन्होंने मरीजों को देखा, लेकिन साथ ही अपनी लाचारी भी जता दी कि रात के समय नियमित रूप से उनका अस्पताल आना संभव नहीं है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। चिकित्सकों की लेटलतीफी और अनुपस्थिति यहां की रोज की कहानी बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सीएमएचओ और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस बदहाली पर आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि समय-समय पर निरीक्षण और जवाबदेही तय की जाती तो करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल की यह दुर्दशा नहीं होती।
डॉक्टर चले गए, मैं कब तक संभालूं
इस पूरे मामले में बीएमओ डॉ. डी. बड़ोदिया ने बताया कि बॉन्ड के तहत नियुक्त डॉक्टर अस्पताल छोडक़र चले गए हैं। मैंने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को लिखित में सूचित कर दिया है। फिलहाल मैं स्वयं ओपीडी संभाल रहा हूं, लेकिन रात के समय बार-बार अस्पताल आना मेरे लिए संभव नहीं होगा। वर्तमान में अस्पताल में कोई नियमित डॉक्टर मौजूद नहीं है।