अमेरिकन वार्ड में बह रही धर्म की बयार, अपनी नींव नहीं भूले पंडित प्रदीप मिश्रा

#Sehore, सीहोर। शहर के बड़े क्षेत्र अमेरिकन वार्ड (बड़ा बाजार क्षेत्र) में इन दिनों भक्ति और धर्म की बयार बह रही है। करीब 26-27 साल पहले जब कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा प्रसिद्ध नहीं हुए थे, तब वे इसी बड़ा बाजार क्षेत्र स्थित अग्रवाल धर्मशाला में कथा का वाचन करते थे। उस समय उन्हें सुनने के लिए महज 50-60 श्रद्धालु महिलाएं आया करती थीं, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि पूरे देश भर में अपनी अमिट छाप छोडऩे के बाद भी पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी नींव को नहीं भूले हैं, वे आज भी हर साल यहां कथा का वाचन करते हैं।
बुधवार को अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। इस दौरान भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
जैसा बोओगे, वैसा काटोगे
कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान जैसा कर्म रूपी बीज बोता है, भविष्य में उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्मों का परिणाम अच्छा और बुरे कर्मों का परिणाम बुरा ही होता है। कर्म का सिद्धांत राजा हो या रंकए सभी पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए छोटे से छोटे कर्म का हिसाब भी सृष्टि में सुरक्षित रहता है। आज जीवन में कोई कष्ट, बीमारी या परेशानी है तो वह हमारे पूर्व कर्मों के बोए बीज का परिणाम हो सकती है, वहीं जीवन का सुख भी अच्छे कर्मों का ही फल है।
नंद के घर आनंद भयो के जयकारों से गूंजा पंडाल
कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया और वासुदेव जी नन्हे कान्हा को टोकरी में लेकर पंडाल में पहुंचे, पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष लगाए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालुओं और महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। भगवान के जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा की गई और माखन-मिश्री व मिठाइयों का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्म की जीवंत झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
अधर्म बढऩे पर अवतार लेते हैं भगवान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान के अवतार का महात्म्य बताते हुए कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि देवकी-वासुदेव के प्रसंग से सीख मिलती है कि जब जीव साधना के मार्ग पर बढ़ता है तो संसार रूपी हथकडिय़ां और बेडिय़ां टूट जाती हैं और प्रभु के प्रेम के द्वार खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण, श्रीमद् भागवत और रामकथा जैसे ग्रंथ मनुष्य को ईश्वर के प्रति समर्पण और सदाचार से जीने की प्रेरणा देते हैं। कथा सुनने के लिए शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।