Sehore News: सीहोर। शहर में विकास हो तो वाहवाही सबकी और यदि कोई अव्यवस्था फैले तो ठीकरा अकेले नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर के सिर… इन दिनों सीहोर नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर शहर की चौपालों और सोशल मीडिया पर कुछ इसी तरह की राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं।
35 वार्डों वाली सीहोर नगर पालिका में भाजपा का पूर्ण बहुमत है। यहां लगभग 20 भाजपा पार्षद हैं, जबकि 10 से अधिक कांग्रेस व निर्दलीय पार्षद मौजूद हैं। उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भी भाजपा के विपिन सास्ता काबिज हैं। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि नगर की किसी भी व्यवस्था या अव्यवस्था में भाजपा के अन्य पार्षदों की सक्रियता और सहयोग लगभग शून्य नजर आ रहा है।
वायरल फोटो के बाद बदली व्यवस्था
इसकी एक ताजा बानगी सावन के पहले सोमवार को देखने को मिली। जब सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक भव्य कांवड़ यात्रा का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें देशभर से हजारों पुरुष व महिला श्रद्धालु पहुंचे। इधर सीवन नदी तट पर महिला श्रद्धालुओं के कपड़े बदलने के लिए नगर पालिका द्वारा एक बेहद छोटा सा टेंट लगाया गया था। श्रद्धालुओं को हुई असुविधा के फोटो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए, नगर पालिका प्रशासन में हडक़ंप मच गया। इसके बाद आनन-फानन में नगर पालिका ने मौके पर पहुंचकर बेहतर और बड़े टेंट की व्यवस्था की।
क्या पार्षदों की कोई जिम्मेदारी नहीं
सोमवार की इस घटना के बाद शहर के नागरिकों के बीच यह सवाल तेजी से तैरने लगा है कि क्या शहर और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी अकेले नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस विकास राठौर की ही है। लोगों का कहना है कि क्या सीवन नदी घाट पर लगे उस छोटे से टेंट पर भाजपा के किसी पार्षद की नजर नहीं पड़ी। क्या वे समय रहते नपा प्रशासन को इसका सुझाव नहीं दे सकते थे। बता दें यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है। अक्सर देखा जा रहा है कि जब तक किसी समस्या की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होती, तब तक धरातल पर सुधार नहीं होता।
भीतरी खींचतान य वजह कुछ और…
शहर के राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा जोरों पर है कि क्या नगर पालिका अंदरूनी तालमेल की कमी है या फिर भाजपा पार्षद खुद को जमीनी जिम्मेदारियों से अलग थलग रखे हुए हैं। वजह जो भी हो, लेकिन सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद ही जगने वाले नपा प्रशासन और पार्षदों की भूमिका पर अब जनता खुलकर सवाल उठा रही है।


