Sehore News: सीहोर। भारतीय संविधान के शिल्पी और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती आज जिले भर में पूरी गरिमा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। जहां एक ओर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़े आयोजन हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता के बीच बाबा साहब के प्रति एक अलग ही तरह की श्रद्धा देखने को मिल रही है। इस बार जयंती के अवसर पर कई परिवारों ने कन्याभोज कराकर बाबा साहब को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
बता दें रविवार सुबह से ही जिला मुख्यालय स्थित गंज क्षेत्र के अंबेडकर पार्क में उत्सव जैसा माहौल रहा। यहां स्थापित बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनुयायियों का तांता लगा रहा। जय भीम के नारों के बीच बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने संविधान निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए संघर्षों को याद किया।
घर-घर में कन्याभोज की परंपरा
इस वर्ष अंबेडकर जयंती पर एक विशेष पहल देखने को मिली। शहर के कई घरों में लोगों ने कन्याभोज का आयोजन कर बाबा साहब का जन्म उत्सव मनाया। आमतौर पर धार्मिक पर्वों पर दिखने वाली यह परंपरा अब सामाजिक क्रांति के अग्रदूत की जयंती पर भी दिखाई दे रही है, जो समाज में समरसता और समानता का संदेश दे रही है।
श्रीमती आशा सूर्यवंशी की अनूठी पहल
गल्ला मंडी स्थित फ्रीगंज निवासी श्रीमती आशा सूर्यवंशी ने इस अवसर पर अपने घर में विशेष कन्याभोज आयोजित किया। उन्होंने आसपास की छोटी-छोटी कन्याओं को सम्मानपूर्वक बुलाकर भोजन कराया और उपहार भेंट किए। आशा सूर्यवंशी ने चर्चा के दौरान बताया कि बाबा साहब ने हमें शिक्षा और सम्मान का अधिकार दिया। मैं हर साल उनकी जयंती पर कन्याभोज कराती हूं। छोटी कन्याओं के चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे बहुत संतोष मिलता है। मुझे लगता है कि समाज की सेवा और बच्चों को प्रेम देना ही बाबा साहब को सच्ची श्रद्धासुमन अर्पित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
समरसता का संदेश
जिले के अन्य हिस्सों में भी प्रभात फेरियां निकाली गईं और सार्वजनिक स्थानों पर बाबा साहब के जीवन दर्शन पर गोष्ठियां आयोजित की गईं। लेकिन घरों के भीतर कन्याभोज जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बाबा साहब अब केवल किताबों या मूर्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर घर की आस्था और संस्कार का हिस्सा बन चुके हैं।


