Sehore News: सीहोर। जिले में बीते 24 घंटों के दौरान हुए मौसम के मिजाज में आए बदलाव ने किसानों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। जिले के इछावर और भेरूंदा सहित दर्जनों गांवों में बर्बादी का ऐसा मंजर है कि जिसे देखकर किसानों के सब्र का बांध टूट गया है।
मौसम विभाग के अनुसार सीहोर में 20 एमएम, इछावर में 5 एमएम और भेरूंदा में 12 एमएम बारिश दर्ज की गई है। लेकिन बारिश से ज्यादा नुकसान उन ओलों ने किया है, जिन्होंने कटाई के लिए तैयार खड़ी गेहूं की लहलहाती बालियों को मिट्टी में मिला दिया। जिन किसानों ने कड़ी मेहनत के बाद फसल काटकर खेतों या खलिहानों में रखी थी, वह भी भीगकर खराब हो चुकी है। अब दाने काले पडऩे और फसल के सडऩे का डर सता रहा है।
घर के खर्च का सहारा छीन गया
पीडि़त किसान जितेंद्र मेवाड़ा ने रूंधे गले से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उनकी तीन एकड़ में लगी गेहूं की फसल कटने ही वाली थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने बताया पूरा साल खून-पसीना एक किया था ताकि बच्चों की स्कूल फीस भर सकूं और घर का खर्च चला सकूं, लेकिन एक ही रात की बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। अब समझ नहीं आ रहा कि परिवार का पेट कैसे पालेंगे। बता दें सिर्फ जितेंद्र की कहानी नहीं है, बल्कि जिले के हजारों किसानों का यही हाल है।
सिस्टम की सुस्ती ने बढ़ाई परेशानी
किसानों का कहना है कि एक तरफ प्रकृति की मार पड़ी है तो दूसरी तरफ प्रशासन की सुस्ती भारी पड़ रही है। जिले में अभी तक गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं हुई है। यदि समय पर तुलाई शुरू हो जाती तो किसान अपनी फसल बेच चुके होते और आज यह नुकसान न झेलना पड़ता। खरीदी केंद्र न खुलने के कारण अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा खराब हो रहा है।
मुआवजे और सर्वे की उठी मांग
संकट की इस घड़ी में किसानों की निगाहें अब सरकार पर टिकी हैं। क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सांसद शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई है कि तत्काल प्रभाव से गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू की जाए। राजस्व विभाग की टीमें भेजकर खेतों का पंचनामा और सर्वे कराया जाए। राहत राशि और फसल बीमा का लाभ जल्द से जल्द दिया जाए।


