@सीहोर। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद अब शहरवासियों के लिए महज परेशानी नहीं, बल्कि एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। कहीं ऐसा न हो कि किसी दिन ये खूंखार कुत्तों की टोलियां किसी इंसान को अपना शिकार बना लें और तब जाकर जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुले।
नगर पालिका सीएमओ ने दावा किया था कि 9 अगस्त से शहर में आवारा कुत्तों को पकडऩे का विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। लेकिन आज 30 अगस्त की तारीख बीत जाने के बाद भी यह अभियान कागजों से बाहर नहीं निकल सका है। अभियान तो दूरए नगर पालिका के हत्थे अब तक एक भी कुत्ता चढ़ा या नहीं, शहरवासी यही तलाश रहे हैं।
रात होते ही सडक़ों पर कब्जा
शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त इलाकों में शाम ढलते ही आवारा कुत्तों का जमावड़ा लग जाता है। खासकर कोतवाली चौराहा, सर्राफा चौराहा, सराय चौराहा, बस स्टैंड, इंग्लिशपुरा, गंज, तहसील चौराहा, नदी चौराहा, मंडी क्षेत्र, कस्बा और रेलवे स्टेशन मार्ग पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। रात के समय इन रास्तों से गुजरने वाले बाइक सवारों के पीछे आवारा कुत्तों के झुंड भौंकते हुए दौड़ पड़ते हैं और पैर पकडऩे का प्रयास करते हैं। इससे कई बार बाइक सवार असंतुलित होकर गिर जाते हैं और हादसों का शिकार हो रहे हैं।
बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल
आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के कारण शहरवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कॉलोनियों और मुख्य सडक़ों पर कुत्तों की टोलियों के कारण बच्चों को ट्यूशन या खेलने भेजने में माता-पिता डर रहे हैं। पैदल चलने वाले राहगीरों पर भी ये कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं।


