दो-दो आईएएस अफसरों पर भारी पड़ी जनपद पंचायत, 6 माह बाद भी नहीं हुई एफआईआर

  • – तत्कालीन और वर्तमान जिपं. सीईओ के आदेशों के बावजूद दोराहा थाने में नहीं अटका मामला
  • – जनपद सीईओ और टीआई के विरोधाभासी बयानों में उलझी फाइल
    #Sehore, सीहोर। जिला प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की किस कदर अनदेखी की जाती है, इसकी बानगी सीहोर की ग्राम पंचायत झरखेड़ा में सामने आए करोड़ों के दुकान निर्माण घोटाले में साफ देखी जा सकती है। जिले में पदस्थ रहे दो-दो आईएएस अफसरों के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनपद पंचायत सीहोर की हीलाहवाली के चलते छह महीने बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।
    पूरे मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बावजूद निचली स्तर की सुस्ती हैरान करने वाली है। तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ आशीष तिवारी ने लगभग दो वर्ष पूर्व इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच के बाद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए थे। इधर वर्तमान जिला पंचायत सीईओ सर्जना यादव ने भी 2 मार्च को जनपद पंचायत सीहोर की सीईओ को आधिकारिक पत्र भेजकर झरखेड़ा में 17 दुकानों के अवैध निर्माण और अवैध आवंटन के मामले में दोषियों के खिलाफ दोराहा थाने में मामला दर्ज कराने के लिखित आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट पाया गया था कि यह निर्माण कार्य मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम तथा स्थावर संपत्ति अंतरण नियम 1994 का खुला उल्लंघन है।
    क्या है पूरा मामला
    ग्राम पंचायत झरखेड़ा में वर्ष 2017 से 2019 के दौरान बिना किसी सक्षम प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति के बेशकीमती शासकीय भूमि पर 17 दुकानों का निर्माण कराया गया। तत्कालीन सरपंच सविता विश्वकर्मा और सचिव मनोहर मेवाड़ा पर आरोप है कि उन्होंने दुकानों के आवंटन के नाम पर दुकानदारों से लाखों रुपए ऐंठे, लेकिन उसकी कोई वैध सरकारी रसीद जारी नहीं की गई। पूरी प्रक्रिया में पूर्व सरपंच के पति का भी अनुचित हस्तक्षेप और साठगांठ पाई गई।
    सीईओ और टीआई के बयानों में उलझा मामला
    आईएएस अफसरों के निर्देशों का पालन कराने के बजाय अब जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामला टाल रहे हैं। जनपद पंचायत सीईओ नमिता बघेल का कहना है कि दोराहा थाने में मामला दर्ज कराने के लिए जो भी आवश्यक दस्तावेज चाहिए थे, वे उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस को करनी है।
    दस्तावेज अधूरे हैं
    इधर दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा का कहना है कि जनपद पंचायत द्वारा भेजे गए दस्तावेज अधूरे हैं। मामले में अभियोजन से कानूनी राय ली जानी बाकी है और फिलहाल जांच जारी है।
    ग्रामीणों में नाराजगी, उठ रहे सवाल
    वरिष्ठ आईएएस अफसरों के आदेश के बाद भी आधा साल बीत जाने पर एपुआईआर दर्ज न होने से झरखेड़ा के ग्रामीणों में नाराजगी है। एक तरफ जनपद सीईओ का दावा है कि औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं तो दूसरी तरफ पुलिस दस्तावेज अधूरे होने का बहाना बना रही है। अफसरों की इस आपसी खींचतान और सुस्ती के चलते शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले और लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले बैफिक्र हैं।