एनएचएम हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर, मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत

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Sehore News: सीहोर। नियमितीकरण सहित अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी रहा। जिले के 502 संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से पूरे जिले, विशेषकर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों व नर्सों की भारी कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
हड़ताली कर्मचारियों के अनुसार हड़ताल के बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त मिशन संचालक द्वारा आंदोलनकारी 502 कर्मियों को नौकरी से निकालने और सेवा समाप्ति की धमकी दी गई है। इस धमकी के बाद कर्मचारियों का आक्रोश और ज्यादा भडक़ गया है। कर्मचारियों ने इस तानाशाही रवैये का कड़ा विरोध करते हुए सीधे मुख्यमंत्री को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी हैए जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की गई है।
नियमित कर्मचारियों का मिला साथ, आंदोलन हुआ तेज
संविदा कर्मचारियों के इस हक की लड़ाई को अब जिले के नियमित स्वास्थ्य कर्मचारियों का भी समर्थन मिल गया है। नियमित स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेता राजेन्द्र भारी और गुलाब सिंह परमार ने हड़ताली कर्मियों के मंच पर पहुंचकर अपना समर्थन जताया। उन्होंने रेल प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संविदा कर्मियों की जायज मांगें जल्द पूरी नहीं की गईंए तो जिले के सभी नियमित स्वास्थ्य कर्मचारी भी काम बंद कर हड़ताल पर उतर जाएंगे।
बता दें यह आंदोलन केवल सीहोर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी इस समय हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी सुध नहीं ली तो वे सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे और आगामी 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव करेंगे।
ये हैं संविदा कर्मचारियों की 8 सूत्रीय मांगें
नियमितीकरण: 30 जनवरी 2026 को भोपाल के लाल परेड मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार सभी एनएचएम संविदा कर्मियों को तुरंत नियमित किया जाए।
पेंशन व स्वास्थ्य बीमा: सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की संविदा नीति के तहत कर्मचारियों को नई पेंशन योजना और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिले।
वार्षिक वेतनवृद्धि: वर्तमान में मिल रहे वेतन पर हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए।
महंगाई भत्ता: नियमित शासकीय कर्मचारियों की तरह संविदा कर्मियों को भी महंगाई भत्ता दिया जाए।
प्रोत्साहन राशि का समायोजन: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के मूल वेतन में ही प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि को समायोजित किया जाए।
वेतन विसंगति दूर हो: सभी संविदा पदों की वेतन विसंगतियों का दोबारा परीक्षण कर उनमें सुधार किया जाए।
अवकाश सुविधा: नियमित कर्मचारियों के समान ही संविदा कर्मियों को भी छुट्टियां मिलने का अधिकार हो।
समान कार्य-समान वेतन: समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के तहत पूरी सुविधाएं, सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।