Sehore News: सीहोर। लकड़ी तस्करों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे पुलिस और वन विभाग को चकमा देने के लिए सरकारी तंत्र के नाम का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। सीहोर और रायसेन जिले के अंतर्गत आने वाले देलावाड़ी वन परिक्षेत्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, यहाँ वन अमले ने मुस्तैदी दिखाते हुए अवैध सागौन की सिल्लियों से भरी दो गाडिय़ा पकड़ी हैं, जिनमें से एक मुख्य बोलेरो गाड़ी पर बड़े-बड़े अक्षरों में आरटीओ (परिवहन विभाग) लिखा हुआ था।
यह हाईटेक हथकंडा सामने आने के बाद अब क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सरकारी बोर्ड लगी गाड़ी से तस्करी होने के कारण अब सीधे आरटीओ प्रशासन संदेह के घेरे में है और जनता के मन में कई गंभीर सवाल गूंज रहे हैं।
नाकों पर चेकिंग से बचने के लिए लगाया बोर्ड
देलावाड़ी वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत खरे के नेतृत्व में जब टीम आमडो क्षेत्र के जंगलों में गश्त कर रही थी, तब उन्हें इन संदिग्ध वाहनों की सूचना मिली, टीम ने जब घेराबंदी कर गाडिय़ों को रोका तो वे दंग रह गए, तस्करों ने नाकों और चेकिंग पॉइंट पर कार्रवाई से बचने के लिए गाड़ी पर आरटीओ की प्लेट लगा रखी थी, ताकि कोई उसे रोकने की हिम्मत न कर सके। जब वन विभाग ने कड़ाई से जांच की तो गाड़ी के अंदर से भारी मात्रा में कीमती सागौन की अवैध सिल्लियां बरामद हुईं। पकड़ी गई मुख्य गाड़ी होशंगाबाद पासिंग की बताई जा रही है।
चार आरोपी गिरफ्तार
वन विभाग ने मौके से गाडिय़ों और अवैध लकड़ी को जब्त करने के साथ ही चार आरोपियों को भी दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों में सुरेश पिता कान्हा बारेला निवासी सुरई ढाबा, अर्पित यादव पिता शारदा प्रसाद यादव निवासी मालाखेड़ी, नीलेश यादव पिता छोटेलाल यादव निवासी मालाखेड़ी और सोहेल शेख पिता नासिर शेख निवासी मालाखेड़ी शामिल हैं।
प्रशासन की चुप्पी से जनता में भारी भ्रम
इस खुलासे के बाद भी सीहोर-रायसेन जिला प्रशासन, वन विभाग और परिवहन विभाग ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी या सफाई सार्वजनिक नहीं की है। विभागों की इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण जनता में भारी भ्रम की स्थिति है। लोग अब खुलकर पूछ रहे हैं कि क्या आरटीओ साहब स्वयं इस तस्करी के खेल में शामिल हैं या उनकी शह पर यह काम हो रहा था। लकड़ी तस्करों के पास परिवहन विभाग के नाम वाली यह गाड़ी कहां से आई। यह गाड़ी कब से और किसके संरक्षण में अवैध सागौन ढोने का काम कर रही थी। नागरिकों का कहना है कि सीहोर और रायसेन जिला प्रशासन को इस संवेदनशील मामले में तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


