Sehore News : सीहोर। जिला मुख्यालय की भाजपा राजनीति में शनिवार का दिन सांगठनिक सर्जरी के बजाय सांगठनिक गलतियों के लिए याद किया जाएगा। सवा साल के लंबे इंतजार के बाद घोषित हुई नगर मंडल की कार्यकारिणी विवादों के ऐसे घेरे में फंसी है कि पार्टी की फजीहत कम होने का नाम नहीं ले रही। सूत्र बताते हैं कि सर्किट हाउस में रात 2 बजे तक चली खींचतान के बाद आनन फानन में जो सूची तैयार हुई, उसमें न केवल सरकारी कर्मचारियों को जगह दी गई, बल्कि सजायाफ्ता कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी सौंप दी गई।
हैरानी की बात यह है कि अनुशासन और डिजिटल कार्यप्रणाली का दम भरने वाली भाजपा की यह सूची कंप्यूटर से टाइप होने के बजाय हाथ से लिखकर जारी की गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गुटीय संतुलन बैठाने और अपने-अपने समर्थकों को उपकृत करने के चक्कर में वरिष्ठ नेताओं के बीच इतनी खींचतान थी कि टाइपिंग तक का समय नहीं मिला। आधी रात को बनी इस फेरहिस्त में एक के बाद एक कई तकनीकी और नैतिक गलतियां सामने आ रही हैं।
गलती नंबर 1. सरकारी कर्मचारी बनी उपाध्यक्ष
नगर मंडल-1 की सूची में अर्चना लखन चौरसिया को उपाध्यक्ष बनाया गया था, जो महिला बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी शासकीय कर्मचारी राजनीतिक पद धारण नहीं कर सकता। मामला तूल पकड़ते ही और कांग्रेस के कड़े विरोध के बाद संगठन ने आनन-फानन में संशोधन किया और उक्त महिला कर्मचारी को हटाकर अब उनके पति को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
गलती नंबर 2. सजायाफ्ता को संगठन में जगह
कार्यकारिणी में दूसरी और सबसे बड़ी चूक सजायाफ्ता कार्यकर्ता को पद देना बताई जा रही है। संगठन के भीतर से ही यह आवाज उठने लगी है कि क्या भाजपा के पास साफ सुथरी छवि वाले कार्यकर्ताओं का टोटा पड़ गया है। नियमों को ताक पर रखकर की गई इन नियुक्तियों ने कार्यकर्ताओं के मनोबल को चोट पहुंचाई है।


