सीहोर। भारतीय काल गणना के अनुसार इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा से शुरू होने वाला हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 कई मायनों में विशेष और खगोलीय दृष्टि से अनूठा होने वाला है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार का नववर्ष 12 माह के बजाय 13 महीनों का होगा। 19 मार्च गुरुवार से शुरू होने वाले इस नववर्ष को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा।
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि विक्रम संवत 2083 में इस बार दो ज्येष्ठ मास होंगे। अधिक मास होने के कारण इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसी वजह से यह हिंदू कैलेंडर 13 महीनों का होगा। शास्त्र सम्मत मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में गुड़ी पड़वा, युगादि और चेती चांद के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
राजा होंगे गुरु और मंत्री पद पर मंगल
नववर्ष का प्रारंभ गुरुवार को होने के कारण इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे, जबकि मंत्री पद भूमिपुत्र मंगल देव के पास रहेगा। इस बार चैत्र नवरात्रि में माता रानी का आगमन पालकी पर होगा, जो कि भक्ति और साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 19 मार्च को नववर्ष के शुभारंभ पर सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा, जिसमें मां भगवती की साधनाए रुद्राभिषेक, सत्यनारायण कथा और सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी होगा।
विश्व पटल पर उथल-पुथल
ग्रहों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए पंडित शर्मा ने बताया कि रौद्र संवत्सर में ग्रहों की युति कुछ असामान्य संकेत दे रही है। कुंभ राशि में शनिदेव के साथ सेनापति मंगल, बुध और राहु की युति बनी हुई है। मंगल और राहु के एक साथ होने से अंगारक योग बन रहा है। इसके कारण विश्व पटल पर राजनीतिक षडय़ंत्र सत्ता परिवर्तन, वैश्विक तनाव और प्राकृतिक असंतुलन जैसी स्थितियां बन सकती हैं। यह वर्ष महंगाई बढ़ाने वाला और विश्व युद्ध या गृह युद्ध जैसी नकारात्मक परिस्थितियों का संकेत दे रहा है।
नवरात्रि में बन रहे कई शुभ संयोग
चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ गुरुवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस शक्ति पर्व में भक्तों को साधना के कई शुभ अवसर मिलेंगे। इन नौ दिनों में सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, द्विपुष्कर योग और पुष्य नक्षत्र जैसे महायोग बनेंगे। नवरात्रि के दौरान मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों के साथ भगवान शंकर और भैरव महाराज की विशेष आराधना की जाएगी। जिले भर के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होंगे। श्रद्धालु अपने घरों को वंदनवार, रंगोली और दीपों से सजाकर नववर्ष का स्वागत करेंगे।


