चॉकलेट का लालच देकर मासूम से की थी दरिंदगी, अब दुष्कर्मी को आखिरी सांस तक जेल

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सीहोर। एक मासूम की मासूमियत का फायदा उठाकर चॉकलेट के बहाने दरिंदगी करने वाले हैवान को कानून ने उसके किए की सख्त सजा दी है। पॉक्सो न्यायालय ने मानसिक रूप से विक्षिप्त एक नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी केदार मेवाड़ा को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने मामले को जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखते हुए दोषी को आखिरी सांस तक आजीवन कारावास उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 3 हजार रुपये का जुर्माना और पीडि़ता को 2 लाख रुपये की प्रतिकर मुआवजा राशि देने के आदेश जारी किए हैं।
चॉकलेट देकर खंडहर ले गया आरोपी
यह घटना 15 सितंबर 2024 को सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच कोतवाली थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार जन्म से ही मानसिक रूप से विक्षिप्त नाबालिग बालिका अपने घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी केदार मेवाड़ा की नजर उस पर पड़ी। उसने बच्ची की मानसिक स्थिति का फायदा उठाने के लिए उसे चॉकलेट का लालच दिया। चॉकलेट देखकर मासूम उसके झांसे में आ गई और आरोपी उसे चुपचाप गांव के ही एक सूने और पुराने खंडहर नुमा मकान में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
खंडहर से आई आवाजें
घर के आंगन से बच्ची के अचानक गायब होने पर परिजनों में हडक़ंप मच गया और उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। ढूंढते ढूंढते जब परिजन गांव के पुराने खंडहर के पास पहुंचेए तो उन्हें अंदर से कुछ संदिग्ध आवाजें सुनाई दीं। जैसे ही परिजन अंदर की तरफ बढ़े आरोपी केदार मेवाड़ा वहां से भागने की कोशिश करने लगा। उसी वक्त अंदर से पीड़िता रोते-चिल्लाते और बुरी तरह सहमी हुई बाहर आई।
परिजनों ने जब आरोपी को पकडऩे का प्रयास किया तो उसने धमकी दी कि यदि पुलिस को बताया तो पूरे परिवार को जान से खत्म कर दूंगा और वहां से फरार हो गया। बाद में रोती हुई मासूम ने अपनी तोतली और सहमी आवाज में परिजनों को बताया कि अंकल ने चॉकलेट देने का लालच देकर बुलाया था और खंडहर में ले जाकर गलत काम किया।
विशेषज्ञों की मदद से दर्ज हुए थे बयान
परिजनों ने तत्काल डायल 100 को सूचना देकर पुलिस बुलाई। चूंकि पीडि़ता मानसिक रूप से अस्वस्थ थी इसलिए पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बाल रोग विशेषज्ञ और मनोविशेषज्ञों की उपस्थिति में उसके बयान दर्ज कराए। पुलिस ने तत्परता से जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया।
न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी और रेखा यादव ने कड़े सबूत और गवाह पेश करते हुए पैरवी की। इस पूरे प्रकरण का संचालन सहायक निदेशक विवेक गौड़ के मार्गदर्शन में हुआ। कोर्ट ने बच्ची के बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सही पाते हुए आरोपी को इस घिनौने कृत्य के लिए उम्रकैद की सख्त सजा से दंडित किया।