सीवन की बदहाली के 20 साल: चार परिषदें आईं और गईं पर नहीं बदली जीवनदायिनी की तकदीर

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सीहोर। शहर की जीवनदायिनी सीवन नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। विडंबना देखिए कि दो दशक पहले सीवन की जो स्थिति थी, आज भी हालात जस के तस हैं। इन 20 वर्षों में नगर पालिका में चार बार परिषदें बदलीं दर्जनों वादे किए गए और फाइलों में कई रिवर फ्रंट प्लान बने, लेकिन धरातल पर सीवन को जीवन देने में हर कोई नाकाम रहा।
बता दें सीवन नदी शहर की एकमात्र जीवन दायिनी हैं, जो शहर के बीचों बीच बहती है। सीवन नदी की वजह से शहर के आधे हिस्से के जलस्त्रोतों को रिचार्ज करने में मदद करती है। साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि पं. प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में प्रतिवर्ष सावन के महीने में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर साल कुबेरेश्वर धाम की कांवड़ यात्रा में देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। वे इसी सीवन के महिला घाट से जल भरकर संकल्प लेते हैं, लेकिन नदी की दुर्दशा और गंदगी देखकर वे एक कड़वी याद साथ ले जाते हैं। कई बार तो सावन के महीने में भी नदी में इतना पानी नहीं होता कि कांवडिय़े आसानी से जल भर सकें।
गहरीकरण के नाम पर केवल मिट्टी निकाली
पिछले दो दशकों में जब भी गहरीकरण की बात हुई वह केवल दिखावा साबित हुई। बिना किसी ठोस प्लानिंग के मशीनें उतारी गईं और कुछ डंपर मिट्टी निकालकर काम समेट लिया गया। इन दो दशकों के दौरान हर बार परिषद को नए अध्यक्ष मिले, सभी से शहरवासियों ने यह उम्मीद लगाई कि यह परिषद सीवन का उद्धार करेगी, लेकिन हर परिषद ने सीवन के प्रति उदासी ही दी है।
अतिक्रमण की चपेट में, नोटिस दिखावे के
बता दें नदी को सुखाने में अतिक्रमणकारियों और ईंट भों ने बड़ी भूमिका निभाई है। नदी के किनारों पर अवैध कब्जे हैं। हाल ही में 44 लोगों को नोटिस दिए गए थे, जिनमें से अधिकांश के पास वैध दस्तावेज तक नहीं थे। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर प्रशासन सुस्त है। ईंट भों के कारण नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।
बीते साल ही दिखाए थे रिवर फ्रंट के सपने
बता दें बीते साल भी नगर पालिका द्वारा सीवन उद्धार को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे। रविन फ्रंट डेवलपमेंट प्लान का राग अलापा गया था। इस प्लान में 7 घाटों के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण का दावा किया गया था। हालांकि यह प्लान महज कागजों ही सीमित होकर रह गया। सीवन को जीवन देने में अब तक धरातल पर ऐसी कोई ठोस प्लानिंग नजर नहीं आई, जिससे कि कहा जा सके कि अब सीवन को जीवन मिलेगा।