सीहोर। जिले में गहराते जल संकट और गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए कलेक्टर बालागुरू के. ने बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 31 जुलाई तक प्रभावी रहेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट में सामने आया है कि जिले के सीहोर, इछावर, आष्टा, बुदनी और भैरूंदा सहित सभी प्रमुख ब्लॉकों में भू-गर्भीय संरचना जल संवर्धन के अनुकूल नहीं है। रबी की फसल के दौरान बारिश (मावठ) न होने और खेती के लिए अत्यधिक पानी निकालने के कारण नलकूपों और हैंडपंपों का जल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया है। गर्मियों में जनता को पीने का पानी मिलता रहे, इसलिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
कलेक्टर ने लगाई यह पाबंदियां
कलेक्टर द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार जिले के समस्त जल स्रोतों बांध, नदी, नहर, झील, जलाशय, नलकूप और कुओं का उपयोग अब केवल पीने और घरेलू कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। बिना अनुमति सिंचाई, औद्योगिक या व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी निकालना पूरी तरह वर्जित है। जिले के शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में निजी तौर पर नए नलकूप (बोरिंग) खोदने पर धारा 6(1) के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।
बोरिंग मशीन प्रतिबंधित
कलेक्टर अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिले की सीमा में कोई भी बोरिंग मशीन संबंधित एसडीएम की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं करेगी। केवल उन मशीनों को छूट होगी जो सार्वजनिक सडक़ों से होकर गुजर रही हैं।
अधिकारियों को जब्ती के अधिकार
रजस्व और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध रूप से जिले में प्रवेश करने वाली या चोरी-छिपे खनन करने वाली मशीनों को तुरंत जब्त किया जाए और संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
उल्लंघन करने पर होगी सजा
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति इस अधिसूचना का उल्लंघन करता पाया गया तो मध्य प्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 09 के तहत उसे 2 वर्ष तक की जेल या 2000 रुपये जुर्माना, अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। यह आदेश सीहोर शहर व ग्रामीण, श्यामपुर, आष्टा, जावर, इछावर, रेहटी, भैरूंदा और बुदनी तहसील के समस्त क्षेत्रों में प्रभावी होगा। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे जल संकट की गंभीरता को समझें और पानी का मितव्ययिता से उपयोग करें।


