इछावर के हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट कर रही अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री…

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सीहोर। मुख्यालय के पास कांकडख़ेड़ा स्थित अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। फैक्ट्री की कार्यप्रणाली न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि अब इछावर क्षेत्र के हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं और धर्म को भ्रष्ट करने का कारण भी बन रही है। मामला फैक्ट्री में गोवंश के चमड़े के उपयोग और बिना ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे गंदे पानी से जुड़ा है।
बता दें अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री के पास गंदे पानी की निकासी के लिए कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। सालों से फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त, बदबूदार और पशुओं के अवशेषों (पाड़े व अन्य चमड़े) वाला पानी सीधे नजदीकी खेतों में छोड़ा जा रहा है।
यही गंदा और अशुद्ध पानी सब्जियों, गेहूं और दाल की फसलों में जा रहा है। इछावर के लोग इन्हीं खेतों में उगी सब्जियां और अनाज खा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस अनाज और सब्जी को खाकर वे अपनी धार्मिक शुद्धता बनाए रखते हैं, उसमें चमड़े युक्त गंदा पानी मिलना सीधे तौर पर उनके धर्म को भ्रष्ट करने जैसा है।
बजरंग दल ने घेरा, ट्रक में मिला गोवंश का चमड़ा
सोमवार सुबह बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सैकड़ाखेड़ी जोड़ के पास कोलकाता से आए एक ट्रक को पकड़ा, जो अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री जा रहा था। कार्यकर्ताओं का दावा है कि ट्रक में गोवंश (गाय) का चमड़ा भरा था। ड्राइवर ने भी पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पहले भी कई बार यहां माल सप्लाई कर चुका है। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी गहमागहमी रही और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे, फैक्ट्री सील करने की मांग
हंगामे के बाद प्रशासन की मौजूदगी में पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने ट्रक और फैक्ट्री के अंदर से कुल पांच सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए सागर भेजा गया है। बजरंग दल और स्थानीय निवासियों ने फैक्ट्री को तत्काल सील करने की मांग की है। हालांकि इछावर तहसीलदार गजेंद्र लोधी ने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावशाली संपर्कों के कारण कार्रवाई में देरी
स्थानीय किसानों ने शिकायत की है कि फैक्ट्री के मालिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जिसके कारण प्रदूषण विभाग और प्रशासन सालों से शिकायतों के बावजूद मौन साधे हुए है। फैक्ट्री के पीछे वाले खेतों में फैल रही बदबू और गंदे पानी ने किसानों का जीना मुहाल कर दिया है और अब यह मुद्दा धार्मिक आस्था से जुडज़ाने के कारण लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।