@सीहोर। वैशाली नगर निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग अनिल कुमार जैन के साथ हुई 4.े53 लाख की साइबर ठगी के बाद पूरे इलाके में हडक़ंप मच गया है। इस वारदात के बाद अब बिजली कंपनी के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रहवासियों के बीच यही चर्चा बनी हुई है कि आखिर उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन बिल जमा करने के महज एक घंटे के भीतर ठगों तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंच गई।
फरियादी अनिल जैन ने 1 सितंबर की सुबह करीब 11.19 बजे अपने बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान किया था। भुगतान के ठीक एक घंटे बाद दोपहर 12.03 बजे उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी हरेंद्र कुमार बताया। उसने दावा किया कि आपका बिल पेमेंट सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ है और थोड़ी ही देर में कनेक्शन काट दिया जाएगा।
डाटा लीक या हैकिंग, उठे बड़े सवाल
जिस हिसाब से ठगों ने बुजुर्ग को निशाना बनाया, उसने पूरे क्षेत्र को चौंका दिया है। घटना के बाद से ही बुजुर्ग के आसपास रहने वाले लोगों में यह आशंका जताई जा रही है कि क्या बिजली कंपनी का ऑनलाइन सर्वर हैक हो चुका है या फिर कंपनी का डाटा लीक हो रहा है। ठग को कैसे पता चला कि उपभोक्ता ने एक घंटे पहले ही ऑनलाइन बिल भरा है। हालांकि डाटा लीक या सर्वर हैकिंग की इन आशंकाओं पर अब तक बिजली कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
व्हाट्सऐप फाइलों के जाल में उलझाकर लगाई चपत
कॉल पर कनेक्शन कटने की धमकी सुनकर बुजुर्ग घबरा गए। शातिर ठग ने उन्हें झांसे में लेते हुए व्हाट्सऐप पर एक पुाइल भेजी और फोन पर बताए अनुसार प्रक्रिया पूरी करने को कहा। जैसे ही पीडि़त ने निर्देशों का पालन किया, ठगों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट काड्र्स में सेंध लगा दी।
खातों और क्रेडिट कार्ड से उड़ाए लाख रुपये
बुजुर्ग के मोबाइल पर जब लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आने शुरू हुए, तब ठगी का अहसास हुआ। पड़ताल में सामने आया कि एसबीआई बैंक खाता से 94244 गायब, बैंक ऑफ बड़ौदा खाता से 55307 गायब, पति के क्रेडिट कार्ड से 96,952.15 का ट्रांजेक्शन और पत्नी के क्रेडिट कार्ड से 2,07,034.15 की चपत। बैंक खातों, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई को मिलाकर ठगों ने कुल 4 लाख 53 हजार 537.30 पार कर दिए।
पुलिस कर रही जांच
पीडि़त की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने बताया कि पुलिस कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजेक्शन और उस ऑनलाइन माध्यम की तकनीकी जांच कर रही है जिससे बिल का भुगतान किया गया था।


