@सीहोर। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण सैकड़ों मासूम लोगों की जान चली गई, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में कई भारतीय नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। इस दुखद त्रासदी पर सीहोर जिले से पहली बार सार्वजनिक रूप से एकजुट होकर संवेदना व्यक्त की गई और नेपाल के पीडि़तों के लिए दुआएं मांगी गईं।
नेपाल की इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मशांति और लापता लोगों की सलामती के लिए योग की पाठशाला सोशल ग्रुप द्वारा पुलिस लाइन ग्राउंड में एक श्रद्धांजलि एवं प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। सार्वजनिक रूप से जिले में आयोजित यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम रहा।
पूरा देश नेपाल के साथ
कार्यक्रम के दौरान योग साधकों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही नेपाल यात्रा के दौरान बाढ़ में फंसे और लापता हुए भारतीयों की शीघ्र व सुरक्षित वापसी के लिए ईश्वर से दुआ मांगी गई। ग्रुप सदस्य कपिल सूर्यवंशी ने बताया कि त्रासदी की इस कठिन घड़ी में पूरा भारत देश नेपाल के नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा है। हमारी प्रार्थना है कि जो लोग इस आपदा में अपने अपनों से बिछड़ गए हैं, वे जल्द से जल्द सुरक्षित अपने परिवारों से मिल सकें।
योगाचार्य दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम (पूरा विश्व एक परिवार है) की रही है। इस विपत्ति की घड़ी में भारत सरकार और पूरे देश की संवेदनाएं नेपालवासियों के साथ हैं। भारत हर संभव मदद का प्रयास कर रहा है।
जंगलों और नदियों को बचाने की अपील
श्रद्धांजलि सभा के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरों और पर्यावरण संतुलन पर भी गहरा चिंतन किया गया। योगाचार्य दिनेश शर्मा ने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में मनुष्य प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहा है, जिसके विनाशकारी परिणाम आज ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियर पिघलने के रूप में सामने आ रहे हैं। यदि ऐसी भीषण त्रासदियों से बचना है तो हमें वापस प्रकृति की ओर लौटना होगा। जंगल, पहाड़ और नदियों को बचाने के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करने की सख्त जरूरत है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस संवेदनशील आयोजन में योग की पाठशाला सोशल ग्रुप के अनेक सदस्य और शहरवासी मौजूद रहे। श्रद्धांजलि देने वालों में मुख्य रूप से राजेश गुप्ता, वीरेंद्र सिंह, भारत चौहान, कपिल सूर्यवंशी, मांगीलाल मालवीय, राजकुमार राठौर, कमल सिंह कवि, बाबूलाल मेवाड़ा, हनुमन्त मेवाड़ा और ब्रजेश पाराशर शामिल थे।


