कार्तिकेय के भूमिपूजन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल… पूछा न पार्षद, न विधायक…

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Sehore News: सीहोर। केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा किए गए एक सडक़ निर्माण के भूमिपूजन को लेकर क्षेत्र में सियासी पारा गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस शासकीय गरिमा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस का आरोप है कि किसी भी संवैधानिक पद पर न होने के बावजूद सिर्फ युवराज होने के नाते कार्तिकेय चौहान से यह सरकारी कार्य करवाया गया है।
दरअसल रविवार को भेरूदा नगर के वार्ड क्रमांक-1 में एक सडक़ निर्माण कार्य का भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान शामिल हुए और उन्होंने ही इस सडक़ परियोजना का भूमिपूजन किया। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने मोर्चा खोल दिया है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछे 8 सवाल
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भेरूदा के अध्यक्ष सुनील गोलिया ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय प्रशासन और सत्तापक्ष को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सीधे तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से आठ सवाल पूछते हुए जनता के सामने अपनी बात रखी है…

  1. 1. पहला और सीधा सवाल यह है कि आखिरकार कार्तिकेय सिंह जी का आधिकारिक पद क्या है।
  2. 2. वे न तो स्थानीय क्षेत्र के पार्षद हैं और न ही नगर पालिका अध्यक्ष हैं।
  3. 3. वे क्षेत्र के न तो विधायक हैं और न ही सांसद।
  4. 4. वे किसी जनप्रतिनिधि (विधायक या सांसद) के आधिकारिक प्रतिनिधि भी नहीं हैं।
  5. 5. तो क्या सिर्फ ‘युवराज’ नेता पुत्र होने के कारण यह भूमिपूजन उनके हाथों से कराया गया।
  6. 6. क्षेत्र का विकास होना चाहिए, हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन ऐसी क्या जल्दबाजी थी जो भरी बरसात के मौसम में सडक़ का भूमिपूजन किया जा रहा है।
  7. 7. क्या इस पूरे काम में स्थानीय चुने हुए पार्षद और नगर पालिका अध्यक्ष का कोई महत्व या काम नहीं रह गया है।
  8. 8. लोकतंत्र में जनता की तरफ से यह एक बड़ा सवाल तो बनता ही है।
    स्थानीय राजनीति में छिड़ी नई बहस
    कांग्रेस अध्यक्ष सुनील गोलिया के इन सवालों के बाद क्षेत्र में प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस का साफ तौर पर कहना है कि जब जनता ने अपने पार्षद, अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधियों को चुना है तो बिना किसी संवैधानिक दर्जे के किसी बाहरी व्यक्ति या परिवार के सदस्य से सरकारी कार्यक्रमों की औपचारिकताएं करवाना लोकतंत्र और चुने हुए प्रतिनिधियों का अपमान है।