Sehore News: सीहोर। जिला मुख्यालय के समीप कांकड़ाखेड़ा स्थित अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। फैक्ट्री की कार्यप्रणाली ने न केवल पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है, बल्कि इछावर क्षेत्र के हजारों हिंदुओं की धार्मिक आस्था पर भी गहरी चोट की है। फैक्ट्री से निकलने वाला चमड़े युक्त गंदा पानी सीधे खेतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे उगने वाली सब्जियों और अनाज से लोगों का धर्म भ्रष्ट होने का डर सता रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में भैंस और अन्य पशुओं के मोटे चमड़े से प्रोटीन पाउडर बनाया जाता है। बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के फैक्ट्री का केमिकल युक्त और बदबूदार पानी खुलेआम खेतों में बहाया जा रहा है। इसी दूषित पानी से क्षेत्र में सब्जीए गेहूं और दाल की फसलें लहलहा रही हैं। इछावर और आसपास के लोग अनजाने में इन्हीं अशुद्ध फसलों का सेवन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जिस अन्न को खाकर अपनी धार्मिक शुद्धता बनाए रखते हैं, उसमें चमड़े का अंश मिलना सीधे तौर पर सनातन परंपराओं पर आघात है।
बजरंग दल ने पकड़ा गाय के चमड़े का ट्रक
दो दिन पहले ही बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर कोलकाता से आए एक ट्रक को घेरा था। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस ट्रक में गोवंश का चमड़ा भरा था, जो अल्फा प्रोटीन फैक्ट्री ही जा रहा था। ट्रक ड्राइवर ने भी इस बात को स्वीकार किया है।
विहिप-बजरंग दल के सामने बड़ी चुनौती
हमेशा सनातनी हिंदुओं की आवाज उठाने वाले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के सामने अब यह सबसे बड़ी चुनौती है कि इस संकट से कैसे निजात दिलाई जाए। एक तरफ फैक्ट्री के मालिक अपने प्रभावशाली संपर्कों के दम पर प्रदूषण विभाग और प्रशासन को मौन साधे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंदू समाज की आस्था दांव पर लगी है। अब देखना यह होगा कि संगठन क्या कदम उठाता है।


