Sehore News: सीहोर। अब तक आपने केवल इंसानों को दिल का दौरा पडऩे या अचेत होने पर सीपीआर देकर जान बचाते हुए सुना या देखा होगा। लेकिन मंगलवार को शहर के शुगर फैक्ट्री चौराहे पर मानवता का एक ऐसा दुर्लभ उदाहरण सामने आया, जिसने सबको हैरान कर दिया। यहां करंट से मृत समझ लिए गए एक बंदर को राहगीरों ने सीपीआर देकर नई जिंदगी दी।
बता दें भीषण गर्मी और 44 डिग्री पारे के बीच पानी की तलाश में भटक रहा एक बंदर शुगर फैक्ट्री चौराहे के पास 33 केव्ही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। करंट इतना भीषण था कि बंदर बुरी तरह झुलस गया और बेजान होकर जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद बिजोरा निवासी राजू मालवीय, नांटू पहलवान और यातायात पुलिस के जवान उसे बेजान देख दुखी हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
बंदर पर ‘सीपीआर’ का सफल प्रयोग
ग्रामीण राजू मालवीय ने बताया कि बंदर की धडक़नें रुक चुकी थीं और शरीर में कोई हलचल नहीं थी। बता दें आमतौर पर लोग करंट लगने पर जानवर को मरा हुआ समझ लेते हैं, लेकिन इन देवदूतों ने बंदर को सीपीआर देना शुरू किया। उन्होंने बंदर की छोटी सी छाती पर अपनी हथेलियों से ठीक उसी तरह दबाव बनाना शुरू किया, जैसा इंसानों की जान बचाने के लिए किया जाता है।
जब धडक़ उठा बेजुबान का दिल
काफी देर तक लगातार छाती को दबानाद्ध देने के बाद चमत्कार हुआ। बंदर के शरीर में हल्की हलचल हुई और उसकी थमी हुई सांसें वापस लौट आईं। होश में आने के बाद बंदर को तुरंत हल्दी वाला दूध पिलाया गया, ताकि अंदरूनी चोटों में राहत मिल सके। कुछ ही देर में मौत के मुंह से बाहर आकर बंदर सामान्य हो गया।


