Sehore: सीहोर के सिद्ध हनुमान मंदिरों का पढ़े इतिहास….

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Sehore News: सीहोर। हनुमान जयंती के पावन पर्व पर आज पूरा जिला भक्ति के रंग में सराबोर है। सीहोर की पावन धरा पर कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारी हनुमान मंदिर हैं, जिनका इतिहास सदियों पुराना है। सीवन नदी के तट से लेकर रेलवे स्टेशन तक विराजे बजरंगबली की महिमा निराली है। आइए जानते हैं जिले के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र हैं।
हनुमान फाटक: जहां राम चरणों में है हनुमान जी की दृष्टि
सीवन नदी के तट पर स्थित हनुमान फाटक मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमान जी की 9 फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है, जबकि मंदिर का मुख्य द्वार महज 4 फीट का है। मंदिर का इतिहास पेशवा काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि प्रथम पेशवा को स्वप्न आने के बाद इस स्वयंभू प्रतिमा को नदी से निकालकर यहां स्थापित किया गया था। मंदिर की विशेषता यह है कि द्वार के ऊपर विराजे भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के चरणों पर हनुमान जी की सीधी नजर पड़ती है, वहीं श्री राम का आशीर्वाद मुद्रा वाला हाथ हनुमान जी के सिर के ऊपर है।
मठ वाले बाबा: जहां आज भी गूंजती है रामधुन
सीवन नदी के दूसरे छोर पर स्थित मठ मंदिर लगभग 267 साल पुराना है। मठाधीश सिद्ध नरहरि दास महाराज की तपोभूमि रहे इस मंदिर के बारे में कई रहस्यमयी कथाएं प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार आज भी कई बार सूने मंदिर से भजन-कीर्तन और रामधुन की आवाजें सुनाई देती हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ लगातार 5 से 7 मंगलवार दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
खड़े हनुमान: कुएं की खुदाई से प्रकट हुए संकटमोचन
रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा अद्भुत है। यहां हनुमान जी एक हाथ में गदा और दूसरे में संजीवनी पर्वत लिए युद्ध मुद्रा में खड़े हैं। इस प्रतिमा का प्राकट्य साल 1947 में हुआ था। बताया जाता है कि किसान नन्नूलाल कुशवाह जब पानी के लिए कुएं की खुदाई कर रहे थे, तब यह विशाल प्रतिमा जमीन के भीतर से सुरक्षित अवस्था में निकली थी। तब से यह मंदिर खड़े हनुमान के नाम से विख्यात है और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं।