किसानों ने खेतों के बीच पसीना बहाकर किया योग, बोले- खेत ही हमारी योगशाला

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Sehore News: सीहोर। रविवार को देश और दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की धूम रही। जहां एक तरफ लोग बड़े-बड़े मैदानों और आलीशान हॉलों में योग कर रहे थे, वहीं जिले के अन्नदाताओं ने एक बेहद अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल पेश की। जिले के किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने किसी बंद कमरे या पार्क में नहीं, बल्कि सीधे अपने खेतों की मिट्टी के बीच जाकर योग किया।
इस अनूठे आयोजन के दौरान ग्राम राणावती, ग्राम हीरापुर और ग्राम चंदेरी के किसान एक साथ खेतों में जुटे। योग करने के बाद किसानों ने बेहद सरल और मार्मिक बात कही। किसानों का कहना था, हम किसानों का असली योग तो इन खेतों में ही होता है। खेती-किसानी के काम में दिन-रात पसीना बहाना ही हमारी सबसे बड़ी शारीरिक क्रिया है। मिट्टी से जुडक़र मेहनत करने से हमारा शरीर अपने आप निरोग और स्वस्थ रहता है।
गांवों में आज भी सेहतमंद हैं 80 से 100 वर्ष के बुजुर्ग
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि इस वक्त जिले के दर्जनों गांवों में ऐसे कई बुजुर्ग किसान मौजूद हैं, जिनकी उम्र 80, 90 और 100 वर्ष के आसपास है। इसके बावजूद वे आज भी पूरी तरह स्वस्थ और आत्मनिर्भर हैं। 90 वर्ष की उम्र पार कर चुके ये बुजुर्ग किसान आज भी अपने खेतों में खुद हल चलाते हैं और खेत जोतते हैं। यही नहीं वे गांव से दो-दो किलोमीटर दूर अपने खेतों पर पैदल जाते हैं, वहां से मवेशियों के लिए घास का भारी ग_ा काटकर, उसे अपने सिर पर लादकर लाते हैं और अपनी गाय-भैंसों को खिलाते हैं।
मेहनत और प्राकृतिक जीवन ही लंबी उम्र का राज
किसानों ने बताया कि दिनभर धूप और छांव में पसीना बहाने, शुद्ध वातावरण में रहने और खेतों में जी-तोड़ मेहनत करने के कारण ही इन बुजुर्गों को आज भी किसी डॉक्टर या जिम की जरूरत नहीं पड़ती। खेतों में आयोजित हुए इस खास योग दिवस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जसराज सिंह मेवाड़ा, महेंद्र पटेल, जालम परमार, विष्णु परमार, रूप सिंह परमार सहित भारी संख्या में ग्रामीण और अन्नदाता उपस्थित रहे।