Sehore News: सीहोर। अस्पताल और मेडिकल की दुकानें मानव जीवन के लिए सबसे अति महत्वपूर्ण और आपातकालीन व्यवस्थाओं में गिनी जाती हैं। लेकिन यदि आप जिले के निवासी हैं तो भगवान से प्रार्थना कीजिए कि कल बुधवार को आप या आपका कोई परिजन बीमार न पड़े। सरकारी नीतियों से नाराज ऑल इंडिया केमिस्ट्स एसोसिएशन के देशव्यापी आह्वान पर बुधवार को जिले के सभी दवा विक्रेता सामूहिक हड़ताल पर जा रहे हैं, जिसके कारण जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
दवा विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष उमेश शर्मा, सचिव नरेश वर्मा और कोषाध्यक्ष दीपक पाटीदार के नेतृत्व में जिले के करीब 700 मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहेंगे। केमिस्ट्स एसोसिएशन ने इस हड़ताल और उससे उत्पन्न होने वाली स्थिति को लेकर जिला प्रशासन को पहले ही लिखित रूप से अवगत करा दिया है। अचानक सभी दवा दुकानें बंद रहने से सबसे बड़ा संकट उन मरीजों पर खड़ा होगा, जिन्हें रोजमर्रा या आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक दवाओं की जरूरत पड़ती है।
आखिर क्यों हड़ताल पर हैं दवा विक्रेता
दवा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार के अडिय़ल रवैये के कारण अब आंदोलन के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। केमिस्ट एसोसिएशन मुख्य रूप से तीन बड़ी समस्याओं को लेकर आक्रोश जता रहा है.
बिना जांच ऑनलाइन दवाओं की बिक्री: एसोसिएशन का आरोप है कि विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉम्र्स पर बिना किसी पुख्ता जांच और डॉक्टर के वैध पर्चे के धड़ल्ले से दवाइयां बेची जा रही हैं। यह सीधे तौर पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
विदेशी कॉरपोरेट्स का डिस्काउंट खेल: बड़े विदेशी कॉरपोरेट्स और ऑनलाइन कंपनियां दवाओं पर भारी-भरकम डिस्काउंट दे रही हैं। इस अनुचित व्यापार प्रतिस्पर्धा के कारण स्थानीय स्तर पर पुश्तों से व्यापार कर रहे छोटे और मध्यम केमिस्टों का कारोबार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
नकली दवाओं का कुप्रभाव: बाजार में पैर पसार रही नकली दवाइयों से देश की आम जनता की सेहत को भारी नुकसान हो रहा है। इसके विरोध में कड़े कानून की मांग की जा रही है।
हड़ताल जरूरी है
दवा विक्रेता संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ उनके व्यापार की नहीं, बल्कि देश की जनता को नकली और अनियंत्रित दवाओं के कुप्रभाव से बचाने की भी है। संगठन के सदस्य लगातार एक-दूसरे से संपर्क कर बुधवार की हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल बनाने की अपील कर रहे हैं।
बता दें केमिस्टों की मांगें अपनी जगह जायज हो सकती हैं, लेकिन इस हड़ताल का सीधा और सबसे बुरा आम जनता पर पडऩे वाला है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन आपातकालीन स्थिति के लिए सरकारी अस्पतालों के दवा काउंटरों पर पुख्ता इंतजाम रखेगा, ताकि किसी मरीज की जान आफत में न आए।


